भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और ऐतिहासिक स्तर पर ले जाते हुए आपसी रिश्तों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) में अपग्रेड करने का बड़ा फैसला किया है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के बीच नई दिल्ली में हुई द्विवार्षिक रणनीतिक वार्ता के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस नई साझेदारी के तहत दोनों देशों ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा और महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार करते हुए साल 2030 तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को ₹35,000 करोड़ (लगभग 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
क्यों खास है यह रणनीतिक साझेदारी?
यह कदम दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क (People-to-People ties) को एक मजबूत कानूनी और रणनीतिक ढांचा प्रदान करेगा।
- सप्लाई चेन का विविधीकरण: इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों देश अपनी निर्भरता को किसी एक देश पर कम कर एक लचीली और सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Resilient Supply Chain) विकसित करना चाहते हैं।
- तकनीक और नवाचार: इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, कृषि क्षेत्र में नवाचार और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
₹35,000 करोड़ का व्यापारिक रोडमैप: इन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस
वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापारिक क्षमता उम्मीद से काफी कम है, जिसे 2030 तक बढ़ाने के लिए प्रमुख क्षेत्रों (Key Sectors) की पहचान की गई है:
- कृषि और खाद्य प्रणालियाँ: न्यूजीलैंड की उन्नत डेयरी तकनीक और कृषि विज्ञान का लाभ भारत को मिलेगा, जबकि भारत से फल, सब्जियां, और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बड़े पैमाने पर न्यूजीलैंड निर्यात किए जाएंगे।
- शिक्षा और फार्मास्यूटिकल्स: भारत के जेनरिक दवा उद्योग (Pharmaceuticals) के लिए न्यूजीलैंड एक बड़ा बाजार बनेगा। साथ ही, भारतीय छात्रों के लिए न्यूजीलैंड में उच्च शिक्षा और वीज़ा प्रक्रियाओं को और अधिक सरल और सुलभ बनाया जाएगा।
- पर्यटन और उड्डयन: दोनों देशों के बीच सीधे हवाई संपर्क (Direct Flights) को शुरू करने की व्यवहार्यता पर काम चल रहा है, जिससे पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं को नई गति मिलेगी।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर एक राय
आर्थिक और व्यापारिक लक्ष्यों से इतर, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों और विदेश मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों को बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के समृद्ध भविष्य का निर्माण करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की सामूहिक आवाज को और मजबूत करेगी।












