मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रसोई गैस (LPG) को लेकर मचे हाहाकार के बीच एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है। जहाँ शहर के हजारों घरों में चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों ने जनता के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है।
मध्य प्रदेश में गहराते एलपीजी संकट (LPG Crisis) ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। भोपाल के लगभग 6,000 परिवार पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं, लेकिन उन्हें ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड मिल रहा है। इस बीच, विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि शहर के आम नागरिक जहाँ एक-एक सिलेंडर को तरस रहे हैं, वहीं भाजपा (BJP) मुख्यालय की रसोई में महीनों का एडवांस स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
| प्रभावित परिवार | भोपाल के लगभग 6,000+ घर (सिलेंडर डिलीवरी में 7-8 दिन की देरी) |
| विवाद का मुख्य कारण | भाजपा मुख्यालय की किचन में कथित तौर पर भारी मात्रा में सिलेंडर स्टॉक होना |
| आम जनता की स्थिति | सर्वर डाउन होने और ‘केवाईसी’ के नाम पर लोग घंटों कतारों में खड़े हैं |
| व्यावसायिक असर | होटलों और रेस्टोरेंट्स को कमर्शियल गैस की सप्लाई लगभग बंद (सिर्फ अस्पताल और स्कूलों को प्राथमिकता) |
| विपक्ष का आरोप | “आम जनता लाइन में, सत्ताधारी दल के किचन में गैस की कोई कमी नहीं” |
| प्रशासन का तर्क | पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल युद्ध) संकट के कारण सप्लाई चेन प्रभावित |
















