रंगों के त्योहार रंग पंचमी पर जहाँ पूरा भोपाल उमंग और उत्साह से सराबोर था, वहीं शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के हमले ने जश्न का माहौल बिगाड़ दिया। सोमवार को त्योहार के दौरान आवारा कुत्तों ने कई लोगों पर हमला किया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई और उत्सव का आनंद काफूर हो गया।
कहाँ-कहाँ हुई घटनाएँ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल के पुराने शहर सहित कई कॉलोनियों और मोहल्लों में रंग पंचमी के जुलूस और उत्सव के दौरान आवारा कुत्तों ने लोगों पर हमला किया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग — सभी इन हमलों की चपेट में आए। घायलों को स्थानीय अस्पतालों में प्राथमिक उपचार दिया गया, जहाँ एंटी-रेबीज इंजेक्शन भी लगाए गए।
लोगों में आक्रोश
स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब गंभीर समस्या बन चुकी है। त्योहार के दिन इस तरह की घटनाएँ और भी दुखद हैं, क्योंकि लोग परिवार के साथ बाहर निकलते हैं और बच्चे खासतौर पर खतरे में पड़ जाते हैं।
नगर निगम पर उठे सवाल
इस घटना के बाद भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम आवारा कुत्तों के नियंत्रण को लेकर पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। पिछले कई महीनों से शहर में कुत्ते काटने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासन का रुख
हालाँकि, स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम के तहत काम किया जा रहा है, लेकिन इसमें समय लगता है।
रंग पंचमी का उत्साह पड़ा फीका
जो त्योहार हँसी-खुशी और रंगों में डूबा होना चाहिए था, वह इन हादसों की वजह से काफी हद तक फीका पड़ गया। कई परिवारों ने अपने बच्चों को घर के अंदर रोक लिया और कुछ लोगों ने बाहर निकलने से परहेज किया।
विशेषज्ञों की राय
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के दौरान भीड़, शोर और रंगों की वजह से कुत्ते उत्तेजित हो जाते हैं, जिससे हमले की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में नगर निगम को त्योहारी सीजन से पहले ही विशेष अभियान चलाना चाहिए।

















