मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इस मामले को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी करार दिया और मृतकों के परिजनों को दिए जा रहे मुआवजे पर भी सवाल खड़े किए।
उमा भारती ने कहा कि किसी व्यक्ति की जिंदगी की कीमत सिर्फ 2 लाख रुपये नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ सोचने और निर्णय लेने की जरूरत है। “एक परिवार का सहारा चला जाता है, बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला जाता है, और हम उसे सिर्फ आंकड़ों में तौल देते हैं,” उन्होंने कहा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर लापरवाही अक्षम्य अपराध है। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि अगर समय रहते जल आपूर्ति की जांच और शुद्धिकरण किया गया होता, तो क्या ये मौतें रोकी नहीं जा सकती थीं?
उमा भारती ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि मुआवजे की राशि पर पुनर्विचार किया जाए और पीड़ित परिवारों को स्थायी सहायता दी जाए।
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद यह मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। विपक्ष पहले ही सरकार को घेर रहा है, वहीं अब उमा भारती के बयान से प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है।

















