विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता का संवर्धन विनियम 2026’ (UGC Equity Regulations 2026) को लेकर देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में तनाव की स्थिति है। यह विवाद अब सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुँच गया है।
1. भेदभाव की ‘एकतरफा’ परिभाषा (Regulation 3c): नियमों के सेक्शन 3(c) में ‘जाति आधारित भेदभाव’ को केवल SC, ST और OBC समुदायों के खिलाफ होने वाले व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह परिभाषा ‘गैर-समावेशी’ है और सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों को इस सुरक्षा के दायरे से बाहर रखती है।
2. OBC का समावेश: 2012 के पुराने नियमों की तुलना में इस बार OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे आरक्षण की मूल भावना और सामान्य श्रेणी के हितों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है।
3. झूठी शिकायतों के लिए सजा का अभाव: 2025 के शुरुआती ड्राफ्ट में गलत या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के लिए दंड का प्रावधान था, जिसे अंतिम नोटिफिकेशन में हटा दिया गया है। शिक्षकों और सामान्य वर्ग के छात्रों को डर है कि इसका उपयोग निजी रंजिश निकालने के लिए किया जा सकता है।
4. ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और भारी जुर्माना: नियमों के तहत हर यूनिवर्सिटी में ‘इक्विटी कमेटी’ और ‘स्क्वॉड’ बनाना अनिवार्य है। नियमों का पालन न करने पर संस्थानों की मान्यता रद्द करने या उनकी ग्रांट (फंडिंग) रोकने जैसे कड़े दंड का प्रावधान है, जिसे संस्थान की स्वायत्तता पर हमला माना जा रहा है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में याचिका: क्या हैं दलील
अधिवक्ता विनीत जिंदल और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं में निम्नलिखित संवैधानिक तर्क दिए गए हैं:
- अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन: याचिका में कहा गया है कि भेदभाव किसी के भी साथ हो सकता है। केवल चुनिंदा जातियों को ‘पीड़ित’ मान लेना संविधान के समानता के अधिकार के खिलाफ है।
- जाति-तटस्थ (Caste-Neutral) नियम की मांग: कोर्ट से मांग की गई है कि नियमों को ‘जाति-तटस्थ’ बनाया जाए ताकि किसी भी वर्ग का छात्र शिकायत कर सके।
- अधिकारों का हनन: इसे ‘काला कानून’ बताते हुए दलील दी गई है कि यह कैंपस में भय का माहौल पैदा करेगा।
विरोध का व्यापक असर
- इस्तीफे: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक सिटी मजिस्ट्रेट और नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी ने इन नियमों के विरोध में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
- सोशल मीडिया: ट्विटर (X) पर #RollbackUGC और #BlackLaw जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
- सरकार का रुख: शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये नियम किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि कैंपस में समावेशी माहौल बनाने के लिए हैं और जल्द ही इस पर स्पष्टीकरण (Clarification) जारी किया जाएगा।

















