अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की आंतरिक सुरक्षा और रोजगार व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की सड़कों पर चल रहे अवैध प्रवासी ट्रक ड्राइवरों (Undocumented Immigrant Truck Drivers) को हटाने और उनकी जगह अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिकों (Military Veterans) को तैनात करने की एक ऐतिहासिक योजना का खाका तैयार किया है।
पेंसिल्वेनिया में एक सम्मलेन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बड़ा बयान दिया। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद अमेरिका के लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में खलबली मच गई है। विशेष रूप से वहां बसे भारतीय समुदाय, खासकर पंजाब और हरियाणा से गए प्रवासियों में भारी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि अमेरिका के ट्रक व्यवसाय में भारतीय मूल के लोगों की एक बहुत बड़ी हिस्सेदारी है.
ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला? सुरक्षा और साइन बोर्ड न पढ़ पाने का दिया हवाला
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के हाईवे पर होने वाले हादसों को लेकर अवैध प्रवासियों को आड़े हाथों लिया:
- सड़क सुरक्षा पर सवाल: ट्रंप ने आरोप लगाया कि अवैध रूप से आए कई प्रवासी ड्राइवर अमेरिकी सड़कों पर लगे साइन बोर्ड ठीक से नहीं पढ़ पाते हैं। उनमें से कुछ के ड्रग्स या अल्कोहल के प्रभाव में गाड़ी चलाने की शिकायतें भी आई हैं, जिससे आम अमेरिकियों की जान को खतरा हो रहा है।
- सैनिकों को सीधा मौका: ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार एक नया नियम ला रही है जिसके तहत अमेरिकी सेना में भारी वाहन (Heavy Vehicle) चलाने का अनुभव रखने वाले हर पूर्व सैनिक को बिना किसी पेचीदा प्रक्रिया के सीधे कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) जारी कर दिया जाएगा, ताकि वे तुरंत इन नौकरियों को संभाल सकें.
1.5 लाख भारतीयों पर कैसे आ सकता है संकट?
‘नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी ट्रकिंग एसोसिएशन’ (NAPTA) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के ट्रकिंग उद्योग में वर्तमान में 1 लाख 30 हजार से लेकर 1 लाख 50 हजार तक ऐसे ट्रक ड्राइवर कार्यरत हैं जो मूल रूप से पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं।
- अवैध प्रवासियों पर सीधा एक्शन: ट्रंप का यह नया प्रस्ताव मुख्य रूप से उन प्रवासियों को निशाना बनाता है जो बिना वैध दस्तावेजों या अवैध रूप से देश में दाखिल हुए हैं। यदि यह सख्ती से लागू होता है, तो इस श्रेणी में आने वाले हजारों भारतीय अपनी नौकरी से हाथ धो सकते हैं।
- लाइसेंस पर पहले से ही चल रही है कतरब्योंत: इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ने मार्च में करीब 2 लाख प्रवासियों के कमर्शियल लाइसेंस रद्द करने के कड़े कदम उठाए थे। इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता और ‘दलीला कानून’ (Dalilah Law) जैसी सख्त नीतियों के कारण भारतीय मूल के ड्राइवरों की मुश्किलें पहले ही बढ़ी हुई हैं.
क्या वैध रूप से रह रहे भारतीयों की नौकरी भी जाएगी?
विमानन और आव्रजन (Immigration) विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रस्ताव से पैनिक (घबराने) की जरूरत उन लोगों को नहीं है जो कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं:
विशेषज्ञों का विश्लेषण: यह नीति विशेष रूप से ‘अवैध’ प्रवासियों को टारगेट करती है। ऐसे भारतीय जो अमेरिका के वैध नागरिक हैं, जिनके पास ग्रीन कार्ड (Green Card) है, या जो वैध वर्क परमिट (EAD) के साथ काम कर रहे हैं, उनकी नौकरियों पर कोई सीधा कानूनी खतरा नहीं है। हालांकि, बाजार में अमेरिकी सैनिकों की एंट्री होने से आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा (Competition) और जांच (Compliance Checks) काफी ज्यादा बढ़ जाएगी.
फिलहाल ट्रंप की इस घोषणा को एक बड़े ‘पॉलिसी प्रपोजल’ के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे पूरी तरह लागू करने के लिए परिवहन विभाग और संघीय एजेंसियों को कार्यकारी आदेश जारी करने होंगे। लेकिन इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप सरकार अमेरिका में ‘फर्स्ट अमेरिकन’ की नीति के तहत प्रवासियों के रोजगार पर कड़े शिकंजे कसने की तैयारी में है.












