नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज (सोमवार) अहम सुनवाई हुई। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए पुलिसिया कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण एवं सख्त मौखिक टिप्पणियां कीं।
सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना और विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। केवल आंदोलन होने के आधार पर पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग (Police Excesses) को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 3 बड़ी बातें:
- “अहिंसक आंदोलन पर लाठीचार्ज मंजूर नहीं”: CJI सूर्यकांत ने कहा, “संविधान के तहत शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में विरोध प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित है। यदि कोई शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा है, तो केवल विरोध होने की वजह से लाठीचार्ज या बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
- प्रदर्शनों से निपटने के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की जरूरत: अदालत ने देशभर में प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल (Uniform Protocol) बनाने की बात कही, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त जगह मिले और अराजक तत्वों पर अलग से कार्रवाई हो सके।
- घायल पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर भी चिंता: कोर्ट ने उन वकीलों की अर्जी को भी सुनवाई में शामिल किया, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों का पक्ष रखा। जस्टिस जोयमाल्य बागची ने कहा कि चाहे छात्र हों या पुलिसकर्मी, किसी भी नागरिक का घायल होना चिंताजनक है और पुलिस बल को भी पर्याप्त सुरक्षा उपकरण (जैसे हेलमेट) मिलने चाहिए।
कल (28 जुलाई) को होगी अगली विस्तृत सुनवाई
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले में सभी तथ्यों के साथ निष्पक्ष सहयोग करेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की ओर से दर्ज याचिकाओं और अन्य संबद्ध मामलों को कल मंगलवार (28 जुलाई) को एक साथ विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन को मिला न्यायिक बल
सुप्रीम कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी को जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों (CJP) और युवा संगठनों के लिए बड़ी न्यायिक राहत माना जा रहा है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और अब सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए मुकदमों और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल और गहरा गए हैं।












