अयोध्या के प्रसिद्ध श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी (Donation Misappropriation) के मामले में नया मोड़ आ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने के बाद वकीलों की संस्था फैजाबाद बार एसोसिएशन (Faizabad Bar Association) ने कड़ा विरोध जताया है।
बार एसोसिएशन के वकीलों ने प्रशासन पर बड़े पदाधिकारियों को बचाने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और मंदिर अधिकारी गोपाल राव के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
वकीलों के विरोध और मांगों के मुख्य बिंदु
- एसएसपी से मिलकर सौंपी मांग पत्र: द हिंदू के अनुसार, फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात की और पूर्व पदाधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही व संलिप्तता का मामला दर्ज करने की मांग की।
- आरोपियों का केस न लड़ने का फैसला: बार एसोसिएशन ने पहले ही यह प्रस्ताव पारित कर रखा है कि वे गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से किसी का भी केस नहीं लड़ेंगे।
- ‘जनता और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़’: वकीलों का तर्क है कि राम मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा की जिम्मेदारी ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों की थी, इसलिए केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े चेहरों को बख्शा नहीं जा सकता।
SIT रिपोर्ट और अब तक की कार्रवाई
- 8 कर्मचारी गिरफ्तार: जून में दर्ज हुई शुरुआती एफआईआर के आधार पर दान की गिनती और परिवहन में लगे 8 कर्मचारियों (जैसे अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा आदि) को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
- इस्तीफा और क्लीन चिट: विवाद गहराने पर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने जून में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में चंपत राय को सीधी चोरी या वित्तीय हेरफेर का दोषी नहीं माना गया है, हालांकि पर्यवेक्षणीय लापरवाही को लेकर प्रशासनिक जांच जारी है।
वकीलों की संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।












