मध्यप्रदेश की सत्ता और प्रशासन के गलियारों में इन दिनों कई हलचलें एक साथ देखने को मिल रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में हैं एक ही बैच के तीन आईएएस अधिकारी, जिन्हें वर्तमान में प्रदेश के सबसे ताकतवर अफसरों में गिना जा रहा है। नीति निर्माण से लेकर फील्ड और सचिवालय स्तर तक इन अधिकारियों की मौजूदगी ने प्रशासनिक संतुलन को नया आकार दिया है। कहा जा रहा है कि आने वाले महीनों में इनके फैसलों का असर दूरगामी होगा।
इधर राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी से जुड़ा मामला अब दिल्ली तक पहुंच चुका है। संगठन और सरकार दोनों स्तर पर इस विषय को गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि अभी औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इतना तय है कि शीर्ष नेतृत्व की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
राजनीतिक संगठन की बात करें तो मध्यप्रदेश भाजपा में महामंत्री राहुल कोठारी का कद लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठनात्मक फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका और केंद्रीय नेतृत्व से बेहतर समन्वय ने उन्हें पार्टी के भरोसेमंद चेहरों में शामिल कर दिया है। आगामी राजनीतिक रणनीतियों में उनकी भूमिका और अहम मानी जा रही है।
प्रशासनिक हलकों में आज से आईएएस अधिकारियों का सालाना जलसा राजधानी में शुरू हो रहा है। इस आयोजन को महज औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आपसी संवाद, नेटवर्किंग और भविष्य की प्रशासनिक दिशा तय करने के मंच के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच, अमर उजाला में मध्यप्रदेश के पूर्व जनसंपर्क संचालक और वरिष्ठ पत्रकार सुरेश तिवारी का कॉलम सत्ता, सिस्टम और सियासत के रिश्तों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर करता है। उनका लेख न सिर्फ अनुभव की झलक देता है, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही वास्तविक राजनीति को भी सामने लाता है।
















