प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026’ के दौरान वैश्विक और भारतीय ऊर्जा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक उच्च-स्तरीय गोलमेज बैठक की। इस बैठक में पीएम मोदी ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाओं का खाका पेश करते हुए वैश्विक निवेशकों को 100 अरब डॉलर के निवेश का न्योता दिया।
$100 अरब का रोडमैप: कहाँ होंगे निवेश?
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य इस दशक के अंत तक तेल और गैस अन्वेषण (Exploration) के क्षेत्र में भारी निवेश आकर्षित करना है।
| क्षेत्र (Sector) | निवेश क्षमता (Potential) | लक्ष्य/विवरण |
| अन्वेषण और उत्पादन | $100 अरब | अन्वेषण क्षेत्र को 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाना। |
| रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स | $87 अरब | रिफाइनिंग क्षमता को 260 MMTPA से बढ़ाकर 300 MMTPA करना। |
| प्राकृतिक गैस क्षेत्र | $72 अरब | गैस आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार। |
| कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) | $30 अरब | हरित ऊर्जा और कचरे से ऊर्जा बनाने के नए अवसर। |
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने दुनिया के 27 बड़े ऊर्जा दिग्गजों (जैसे TotalEnergies, BP, Vitol, Vedanta) के सामने भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का पक्ष रखा।
बैठक के मुख्य बिंदु:
- तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: पीएम ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की ओर अग्रसर है। यह वृद्धि वैश्विक ऊर्जा मांग और आपूर्ति के संतुलन को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
- नीतिगत स्थिरता: CEOs ने भारत में ‘पॉलिसी स्टेबिलिटी’ और ‘रिफॉर्म मोमेंटम’ की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि उद्योग जगत से मिलने वाला सीधा फीडबैक सरकार को अपनी नीतियों को और अधिक ‘इन्वेस्टर फ्रेंडली’ बनाने में मदद करता है।
- ऊर्जा स्वतंत्रता (Energy Independence): उन्होंने ‘समुद्र मंथन’ परियोजना (गहरे समुद्र में अन्वेषण) और अंडमान-निकोबार बेसिन में हाइड्रोकार्बन की नई उम्मीदों का जिक्र किया। भारत अब ‘ऊर्जा सुरक्षा’ से आगे बढ़कर ‘ऊर्जा स्वतंत्रता’ के मिशन पर काम कर रहा है। [Image showing global energy leaders expressing confidence in India’s growth]
- मेक इन इंडिया: पीएम ने आह्वान किया— “Make in India, Innovate in India, Scale with India, and Invest in India.” उन्होंने जहाज निर्माण (Shipbuilding) के लिए ₹70,000 करोड़ के कार्यक्रम का भी उल्लेख किया।
निष्कर्ष: इंडिया एनर्जी वीक 2026 के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह वैश्विक ऊर्जा संकट के समय में एक स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद भागीदार है। $100 अरब का यह निवेश न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि लाखों नए रोजगार भी पैदा करेगा।
















