देश के करोड़ों जरूरतमंद पेंशनर्स के लिए एक बड़ी निराशाजनक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम यानी NSAP के तहत पेंशन पाने वाले बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को अब भी राहत नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में साफ कह दिया है कि फिलहाल पेंशन राशि बढ़ाने या लाभार्थियों का दायरा बड़ा करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
नीति आयोग की सिफारिश भी नहीं आई काम
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने खुद माना कि नीति आयोग सहित कई संस्थाओं ने अपने मूल्यांकन में पेंशन राशि बढ़ाने की स्पष्ट सिफारिश की थी। इन अध्ययनों में यह भी उजागर हुआ था कि अधिकांश लाभार्थी इस पेंशन का उपयोग खाने-पीने और दवाइयों जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए करते हैं। इसके बावजूद सरकार ने राशि बढ़ाने से मना कर दिया।
कितनी मिलती है अभी पेंशन?
60 से 79 वर्ष के बुजुर्गों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत प्रतिमाह कुल 600 रुपये मिलते हैं, जिसमें केंद्र का हिस्सा मात्र 200 रुपये है। 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी 600 रुपये ही दिए जाते हैं। विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन में भी यही राशि तय है। महंगाई के इस दौर में यह रकम ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर मानी जाती है।
MP के 22 लाख लाभार्थियों को सीधा नुकसान
अकेले मध्यप्रदेश में NSAP के तहत करीब 22 लाख 5 हजार लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग, विधवाएं और दिव्यांग हैं जिनके लिए यही पेंशन जीवन का एकमात्र सहारा है। केंद्र के इस फैसले से इन सभी को गहरा झटका लगा है।
विपक्ष का हमला, सामाजिक संगठनों में रोष
विपक्षी दलों ने सरकार के इस रवैये को संवेदनहीन करार दिया है। उनका कहना है कि जब नीति आयोग जैसी संस्था खुद बढ़ोतरी की बात कर रही हो और सरकार उसे नजरअंदाज करे, तो यह साफ दिखाता है कि कमजोर तबके की चिंता किसे है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कम से कम पेंशन राशि को महंगाई के अनुपात में 2000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
















