छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम दूधली में आयोजित यह 5 दिवसीय जंबूरी देश की पहली रोवर-रेंजर जंबूरी है। इसमें भारत के सभी राज्यों सहित विदेशों से भी लगभग 15,000 रोवर और रेंजर हिस्सा ले रहे हैं।
| गतिविधि | विवरण |
| थीम (Theme) | “सशक्त युवा, विकसित भारत” (Sashakt Yuva, Viksit Bharat) |
| प्रतिभागी | 15 से 25 वर्ष की आयु के रोवर, रेंजर और राष्ट्रपति अवार्डी। |
| प्रमुख आयोजन | एडवेंचर एक्टिविटी, ग्लोबल विलेज, यूथ पार्लियामेंट और सांस्कृतिक कार्यक्रम। |
| उद्देश्य | एकता, साहस, और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सुदृढ़ करना। |
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऐसी जंबूरी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कारों की पाठशाला है।
मुख्यमंत्री के संबोधन के मुख्य अंश:
- अनुशासन और चरित्र निर्माण: मुख्यमंत्री ने कहा कि स्काउटिंग-गाइडिंग युवाओं को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और अनुशासन के साथ कार्य करना सिखाती है। जंबूरी में विभिन्न संस्कृतियों का मिलन युवाओं को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में पिरोता है।
- सेवा परमो धर्म: उन्होंने जोर दिया कि रोवर-रेंजर का मुख्य लक्ष्य ‘सेवा’ है। चाहे आपदा प्रबंधन हो या सामाजिक कार्य, स्काउट्स हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते हैं। यह मंच उनके भीतर निस्वार्थ सेवा के भाव को और सशक्त बनाएगा।
- युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत: डॉ. यादव ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर है। जंबूरी के माध्यम से मिलने वाला ‘लीडरशिप’ प्रशिक्षण उन्हें भविष्य का कुशल नागरिक बनाएगा। [Image showing cultural exchange between participants from different states]
आयोजन का महत्व: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और शिक्षा मंत्री ने भी इस ऐतिहासिक जंबूरी का उद्घाटन किया। मध्य प्रदेश से भी एक बड़ा दल इस आयोजन में अपनी कला, संस्कृति और साहस का प्रदर्शन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यहाँ से लौटकर युवा अपने-अपने क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनेंगे।

















