मध्य प्रदेश सरकार ने कैदियों के सामाजिक पुनर्वास और सुधार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब पुरुष कैदियों के साथ-साथ महिला सजायाफ्ता कैदियों के लिए भी ‘ओपन जेल’ (खुले जेल परिसर) की व्यवस्था लागू करने जा रही है।
जेल विभाग द्वारा अच्छे आचरण और पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाली महिला कैदियों की सूची तैयार कर ली गई है, जिस पर जेल मंत्री की अंतिम मंजूरी मिलते ही पात्र महिला कैदियों को खुले जेल परिसरों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
क्या है ‘ओपन जेल’ की व्यवस्था और मुख्य विशेषताएं?
- परिवार के साथ रहने की आजादी: ओपन जेल व्यवस्था के तहत पात्र महिला कैदी अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ परिसर में बने दो कमरों के आवास में सामान्य जीवन जी सकेंगी।
- आजीविका और काम की छूट: सुबह निश्चित समय पर महिला कैदियों को परिसर के बाहर जाकर आजीविका कमाने, सिलाई, हस्तशिल्प, मजदूरी या अन्य व्यवसाय करने की अनुमति होगी। शाम को तय समय सीमा के भीतर उन्हें परिसर में वापस रिपोर्ट करना होगा।
- कम से कम सुरक्षा तंत्र: परंपरागत जेलों की ऊंची दीवारों, लोहे के सलाखों और कड़े पहरे के विपरीत ओपन जेलों में न्यूनतम सुरक्षा व्यवस्था होती है, जिससे कैदियों में सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण विकसित हो सके।
चयन के लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
ओपन जेल में स्थानांतरण के लिए जेल विभाग द्वारा कड़े मानदंड तय किए गए हैं:
- कैदी ने अपनी कुल सजा का एक निश्चित और महत्वपूर्ण हिस्सा सामान्य जेल में संतोषजनक ढंग से पूरा कर लिया हो।
- जेल में रहने के दौरान कैदी का आचरण और व्यवहार (Good Conduct) उत्कृष्ट रहा हो।
- जघन्य/गंभीर अपराधों या समाज के लिए अत्यधिक खतरनाक श्रेणी में न आने वाली महिला बंदियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
मध्य प्रदेश में ओपन जेल मॉडल का विस्तार
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन (भैरवगढ़) और अन्य जिलों में पहले से ही पुरुष कैदियों के लिए ओपन जेल कॉलोनियां सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में नए खुले जेल परिसरों के उद्घाटन के बाद अब महिला कैदियों को इस सुधारत्मक नीति के दायरे में लाकर सरकार उनके पुनर्वास को और सशक्त बना रही है।












