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सरकारी स्कूल में गंदे शौचालय और दरकती दीवारें — छात्रों ने उठाई आवाज, प्रशासन पर उठे सवाल

Authentic News by Authentic News
March 10, 2026
in Madhya Pradesh News, News
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मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूल में गंदे शौचालय और दरकती दीवारें, छात्रों ने उठाई आवाज

image source:google.com

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मध्यप्रदेश। एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के एक सरकारी स्कूल की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्कूल में गंदे और बदबूदार शौचालय, दरकती हुई दीवारें और जर्जर हो चुकी इमारत से परेशान छात्रों ने अब अपनी आवाज बुलंद कर दी है। इस मामले ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

क्या है स्कूल की असली स्थिति?

स्कूल के छात्रों और उनके अभिभावकों ने बताया कि शौचालय इतने गंदे हैं कि उनके पास जाना भी मुश्किल हो जाता है। शौचालयों में साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है और दुर्गंध इतनी तेज है कि बच्चे शौचालय जाने से कतराते हैं। खासकर छात्राओं को इस समस्या से सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बच्चियां तो स्कूल के दौरान शौचालय का उपयोग ही छोड़ देती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

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दरकती दीवारें बनीं खतरे की घंटी

शौचालय की समस्या के अलावा स्कूल की इमारत भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कक्षाओं की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और छत से प्लास्टर झड़ने लगा है। कई कमरों की हालत इतनी खराब है कि बारिश के मौसम में उनमें पानी भर जाता है। ऐसे में बच्चों की जान हमेशा खतरे में रहती है। अभिभावकों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

छात्रों ने उठाई आवाज

हालात से परेशान छात्रों ने स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई है। बच्चों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। कुछ छात्रों ने तो यहां तक कह दिया कि जब तक हालात नहीं सुधरते, वे स्कूल आना बंद कर देंगे। अभिभावकों ने भी एकजुट होकर प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

अभिभावकों का फूटा गुस्सा

बच्चों के माता-पिता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल भेजते हैं, लेकिन यहां पढ़ाई तो दूर, बच्चों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो रहीं। उन्होंने कहा कि गंदे शौचालयों के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और दरकती दीवारों के बीच पढ़ना किसी खतरे से कम नहीं। अभिभावकों ने मांग की है कि सरकार तुरंत स्कूल की मरम्मत कराए और साफ-सफाई सुनिश्चित करे।

शिक्षा विभाग पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि सरकारी स्कूलों के रखरखाव के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, फिर भी इन स्कूलों की यह हालत क्यों है, यह जांच का विषय है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी यह सवाल पूछा जा रहा है कि उनके क्षेत्र के स्कूल इस बदहाल स्थिति में क्यों हैं।

स्थानीय प्रशासन का रवैया

स्थानीय प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यही आश्वासन वे पिछले कई सालों से सुन रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया।

सरकारी स्कूलों की व्यापक समस्या

यह मामला अकेला नहीं है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में सरकारी स्कूलों की ऐसी ही दुर्दशा की खबरें सामने आती रहती हैं। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत हर बच्चे को साफ, सुरक्षित और अच्छे वातावरण में पढ़ने का अधिकार है, लेकिन जमीनी हकीकत इस कानून की धज्जियां उड़ाती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं सुधरतीं, तब तक शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाना संभव नहीं है।

क्या होगा आगे?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। छात्रों और अभिभावकों ने साफ कर दिया है कि वे अब और इंतजार नहीं करेंगे। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह मामला और बड़ा आंदोलन का रूप ले सकता है।

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