मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs – CWSN) को शिक्षा देने वाले 252 विशेष शिक्षकों (Special Educators) की सेवाएं अचानक समाप्त किए जाने के बाद राज्य के शिक्षा जगत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य शिक्षा केंद्र (RSK) द्वारा संविदा अवधि न बढ़ाए जाने के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में नामांकित 1 लाख से अधिक दिव्यांग विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) पर गहरा अनिश्चितता का संकट मंडराने लगा है।
अचानक सेवा समाप्ति से नाराज विशेष शिक्षकों ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है तथा फैसला वापस न लिए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
🚨 क्या है पूरा मामला और क्यों संकट में पड़ा बच्चों का भविष्य?
- समग्र शिक्षा अभियान के तहत हुई थी नियुक्ति: मध्य प्रदेश के सरकारी और समावेशी स्कूलों में पढ़ने वाले दृष्टिबाधित, मूक-बधिर, मानसिक रूप से दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए ‘समग्र शिक्षा योजना’ के तहत इन विशेष शिक्षकों को तैनात किया गया था।
- संविदा सेवा विस्तार न मिलना: विभागीय आदेशों के तहत इन 252 रिसोर्स पर्सन/विशेष शिक्षकों के संविदा अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, जिससे वे रातों-रात बेरोजगार हो गए।
- 1 लाख से अधिक CWSN छात्र प्रभावित: विशेष शिक्षकों की अनुपस्थिति में सामान्य शिक्षक इन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की इंडिविजुअल एजुकेशन प्लान (IEP), ब्रेल लिपि, साइन लैंग्वेज और विशेष थेरेपी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हैं। इससे इन मासूम बच्चों के स्कूल छोड़ने (Drop Out) की संभावना काफी बढ़ गई है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन होने का आरोप
विशेष शिक्षक संघ और शिक्षा विशेषज्ञों ने राज्य सरकार के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है:
- सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स: सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि देश के सभी राज्यों को दिव्यांग बच्चों की संख्या के अनुपात में स्थायी विशेष शिक्षकों (Permanent Special Educators) की भर्ती करनी चाहिए ताकि उनका मौलिक शिक्षा का अधिकार (RTE) प्रभावित न हो।
- शिक्षकों का पक्ष: संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि “हम पिछले 10-12 वर्षों से अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। नियमितीकरण (Regularization) की नीति बनाने के बजाय हमें नौकरी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।”
विपक्ष हमलावर, बहाली और नीति बनाने की मांग
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने मोहन यादव सरकार पर निशाना साधा है। मांग की जा रही है कि:
- सेवाएं समाप्त किए गए सभी 252 विशेष शिक्षकों को तुरंत काम पर वापस लिया जाए।
- मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए नियमित पदों का सृजन कर स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।












