मध्य प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद अब दिल्ली हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को सक्रिय करने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने एमपी कांग्रेस के दिग्गजों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे “ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स” छोड़कर सड़कों पर उतरें और मोहन यादव सरकार को जनता के मुद्दों पर घेरें।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई हालिया समीक्षा बैठक में हाईकमान ने एमपी कांग्रेस की वर्तमान सुस्ती पर नाराजगी जाहिर की है। पार्टी ने प्रदेश इकाई को निम्नलिखित ‘टारगेट’ दिए हैं:
| प्राथमिकता | मुख्य लक्ष्य (Target) |
| सड़क पर संघर्ष | बिजली बिल, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर बड़े आंदोलन शुरू करना। |
| संगठन सृजन | 31 मार्च तक खाली पड़े ब्लॉक और जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां पूरी करना। |
| सोशल मीडिया | सरकार की विफलताओं को डेटा के साथ जनता के बीच ले जाना। |
हाईकमान ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में केवल ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ करने से काम नहीं चलेगा। बड़े नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य स्तर पर सामूहिक रूप से सक्रिय होना होगा।
रणनीति के मुख्य बिंदु:
- जीतू पटवारी की चुनौती: प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर अब दबाव है कि वे पूरी कार्यकारिणी को मैदान में उतारें। हाईकमान ने कहा है कि जो पदाधिकारी सक्रिय नहीं हैं, उन्हें तत्काल पद से हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जाए।
- जनता के बीच पैठ: कांग्रेस अब ‘संविधान बचाओ’ यात्रा और स्थानीय जन-समस्याओं को लेकर पदयात्राएं निकालने की योजना बना रही है। खास तौर पर बेरोजगारी और हालिया ‘यूजीसी बिल’ जैसे मुद्दों को भुनाने की तैयारी है।
- बूथ मैनेजमेंट: पार्टी का मानना है कि संगठन में “सृजन” तभी होगा जब बूथ स्तर के कार्यकर्ता को सक्रिय किया जाएगा। इसके लिए ‘एक बूथ, पांच यूथ’ की तर्ज पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष: आगामी नगर निगम चुनावों और उपचुनावों को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह ‘करो या मरो’ की स्थिति है। हाईकमान के इस सख्त निर्देश के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की सड़कों पर विपक्षी तेवर और तीखे दिखाई देंगे।

















