: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को करीब 5 घंटे तक ब्लॉक/अवरुद्ध रखे जाने के मामले में भारत सरकार की संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on IT) ने सोशल मीडिया दिग्गज ‘मेटा’ (Meta) के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है।
संसदीय समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि मेटा के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग को इस गंभीर लापरवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी होगी। यदि जुकरबर्ग व्यक्तिगत रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो केंद्र सरकार को आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मेटा को प्राप्त ‘सेफ हार्बर प्रोटेक्शन’ (Safe Harbour Protection) वापस लेने पर विचार करना चाहिए।
🔥 3 घंटे चली बैठक में संसदीय समिति के 4 मुख्य बिंदु:
- 5 घंटे तक गायब रहा पीएम का वीडियो: निशिकांत दुबे ने बताया कि समिति की तीन घंटे से अधिक चली बैठक में मेटा प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि पीएम मोदी का वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (लगभग 5 घंटे) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं था।
- सेफ हार्बर (Section 79) छीनने की चेतावनी: कानून के तहत ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करता है। निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि विदेशी कंपनियां भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने को अस्थिर करने का काम करेंगी, तो उनसे यह कानूनी ढाल वापस ले ली जानी चाहिए।
- एल्गोरिदम का पक्षपात (Algorithmic Bias): समिति के सदस्यों ने सोशल मीडिया कंपनियों के एल्गोरिदम पर सवाल उठाए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने में ढिलाई बरती जाती है, जबकि देश के प्रधानमंत्री की पोस्ट को तुरंत ऑटो-हटा दिया जाता है।
- 10 दिनों के भीतर लिखित जवाब तलब: संसदीय पैनल ने मेटा को इस पूरे घटनाक्रम और तकनीकी चूक की जांच पर 10 दिनों के भीतर विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण सौंपने का निर्देश दिया है।
मेटा प्रतिनिधियों ने जताया खेद, सरकार ने कहा- ‘सफाई नाकाफी’
संसदीय समिति के सामने पेश हुए मेटा प्रतिनिधियों ने घटना पर खेद व्यक्त किया और बताया कि यह स्वचालित एल्गोरिदम और डीपफेक पहचान प्रणाली (Deepfake Detection System) की गलती के कारण हुआ था। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और समिति के सदस्यों ने इस सफाई को पूरी तरह “अपर्याप्त” करार देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही (Accountability) तय करने और कानूनी कार्रवाई पर जोर दिया।
इस उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ गूगल, यूट्यूब, एक्स (X) और स्नैपचैट के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।












