लोकप्रिय टीवी रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के मंच पर पूछे गए एक सवाल का असर अब देश की सबसे स्वच्छ नगरी इंदौर की सड़कों और चाय-दूध की चौपालों तक पहुँच गया है। केबीसी के हालिया एपिसोड में डेरी सेक्टर, दूध उत्पादन और उससे जुड़ी तकनीकों/ब्रांड्स से संबंधित पूछे गए प्रश्न के बाद इंदौर में दूध के स्वाद, पैकेटबंद बनाम ताजा दूध और सांची (Sanchi) जैसी सहकारी डेरी की भूमिका को लेकर एक नई बहस (Dairy Debate) छिड़ गई है।
खान-पान के शौकीनों के शहर इंदौर में यह मुद्दा केवल केबीसी का सवाल बनकर नहीं रहा, बल्कि शहर के डेरी संचालकों, आम ग्राहकों और खाद्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
इंदौर में क्यों गरम हुआ ‘डेरी डिबेट’ का माहौल?
- सांची बनाम प्राइवेट डेरी ब्रांड्स: केबीसी में डेरी उद्योग का जिक्र आते ही इंदौर में सांची डेरी और अमूल जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ-साथ local डेरी संचालकों के दूध की शुद्धता और फैट काउंट (Fat Count) की तुलना होने लगी है।
- पैकेटबंद vs खुला दूध: इंदौर के मालवा क्षेत्र में परंपरागत रूप से ताजा और खुला दूध पसंद करने वाले लोगों और आधुनिक हाइजीनिक पैकेटबंद दूध के समर्थकों के बीच गुणवत्ता को लेकर बहस छिड़ गई है।
- दूध में मिलावट और शुद्धता टेस्ट: शो के बाद आम लोग भी दूध में होने वाली मिलावट (Adulteration) और उसके मानक पैमानों के प्रति अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं। इंदौर के दुग्ध संघ और खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं।
🗣️ इंदौर के नागरिकों और व्यापारियों की प्रतिक्रिया
इंदौर के स्थानीय डेरी विक्रेताओं का कहना है कि केबीसी जैसे राष्ट्रीय मंच पर डेरी उद्योग से जुड़े तथ्य दिखाए जाने से उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ी है। वहीं, इंदौर दुग्ध संघ के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की चर्चाओं से शुद्ध और पाश्चुरीकृत (Pasteurized) दूध के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होता है।












