मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हालिया ‘परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स’ (PGI-D) रिपोर्ट को आधार बनाकर मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जीतू पटवारी ने बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर बयां करती है। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का एक भी जिला 60 प्रतिशत से अधिक स्कोर हासिल करने में नाकाम रहा है, जो राज्य में शिक्षा के गिरते स्तर का साफ प्रमाण है।
बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी का आरोप कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जरूरी बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति और शिक्षण सामग्री का भारी अभाव है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कागजों पर ‘सीएम राइज स्कूल’ और डिजिटल शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
जवाबदेही तय करने की मांग पटवारी ने मांग की है कि शिक्षा विभाग की इस नाकामी पर सरकार श्वेत पत्र जारी करे और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। उन्होंने कहा कि बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।












