ईरान में सत्ता का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। 8 मार्च 2026 को ईरान की “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” — यानी वह 88 सदस्यीय धार्मिक परिषद जो देश के सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है — ने बहुमत के साथ मुज्तबा खामेनेई को 1979 में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना के बाद से तीसरे सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया। वे उसी अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं जिन्हें अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मार दिया गया था।
पिता की हत्या, बेटे को गद्दी
37 साल तक ईरान पर शासन करने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के तेहरान पर हमले में मारे गए — यह युद्ध का पहला दिन था इस हमले में मुज्तबा की माँ, पत्नी और एक बहन भी मारी गईं, लेकिन मुज्तबा खुद उस वक्त वहाँ मौजूद नहीं थे और इस भीषण बमबारी में अब तक जीवित हैं। पिता की मौत के मात्र आठ दिन बाद ही बेटे को सर्वोच्च नेता की कुर्सी सौंप दी गई।
कौन हैं मुज्तबा खामेनेई?
56 वर्षीय मुज्तबा अपने पिता के केवल दूसरे पुत्र हैं और अब इस्लामिक गणराज्य का नेतृत्व करने वाले महज तीसरे व्यक्ति बन गए हैं। मुज्तबा ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा, न कभी सार्वजनिक भाषण दिया, न शुक्रवार का खुतबा और न ही कोई राजनीतिक संबोधन — यहाँ तक कि बहुत से ईरानियों ने उनकी आवाज़ तक कभी नहीं सुनी, हालांकि वे जानते थे कि वे धार्मिक सत्ता प्रतिष्ठान में एक उभरता हुआ सितारा हैं।
मुज्तबा एक मध्यम श्रेणी के धर्मगुरु हैं जिनका IRGC यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में गहरा प्रभाव है। वे IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी, पूर्व IRGC खुफिया प्रमुख हुसैन तएब और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ जैसे ताकतवर नामों के करीबी माने जाते हैं।
IRGC के दबाव में हुआ चुनाव
यह नियुक्ति बिल्कुल भी आसान नहीं रही। 3 मार्च की शुरुआत से ही IRGC कमांडरों ने असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्यों पर मुज्तबा खामेनेई के पक्ष में मतदान करने के लिए भारी दबाव डाला और “बार-बार संपर्क तथा मनोवैज्ञानिक व राजनीतिक दबाव” बनाए रखा। पहली चुनावी बैठक 3 मार्च को ऑनलाइन हुई जहाँ जो सदस्य मुज्तबा के विरुद्ध तर्क दे रहे थे उन्हें बोलने का “सीमित समय” दिया गया और जल्दबाजी में मतदान कराया गया।
असेंबली के एक सदस्य ने बताया कि “अयातुल्ला अली खामेनेई खुद अपने जीवनकाल में बेटे की नेतृत्व संभावना से खुश नहीं थे और उन्होंने कभी इस मुद्दे को उठाने नहीं दिया था। इसके बावजूद सत्ता के कट्टर तत्वों ने मुज्तबा की नियुक्ति को जल्दी से जल्दी करा लिया।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही Axios को दिए इंटरव्यू में कह दिया था कि “मुज्तबा खामेनेई मुझे स्वीकार्य नहीं हैं” और वे खुद ईरान के नए नेता के चुनाव में हस्तक्षेप करना चाहते हैं। नियुक्ति की घोषणा के बाद ट्रंप ने फिर चेतावनी दोहराई कि बिना वाशिंगटन की मंजूरी के नया नेता “ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।”
इजरायल ने भी ललकारा
इजरायली सेना ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि अली खामेनेई का कोई भी उत्तराधिकारी उनका सीधा निशाना बनेगा। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका लक्ष्य ईरानी शासन को अस्थिर करना और वहाँ बदलाव लाना है।
युद्ध के बीच नए नेता की कठिन राह
मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति की घोषणा के महज कुछ घंटों बाद ईरान ने नई मिसाइलें दागीं और इजरायल ने तेहरान के ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाते हुए नए हमले किए। इस बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं — रूस के यूक्रेन आक्रमण के बाद यह पहली बार हुआ।
मुज्तबा खामेनेई को अब इस्लामिक गणराज्य के 47 साल के इतिहास के सबसे बड़े संकट के दौर में देश का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमेरिका की “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की माँग, इजरायल के लगातार हमले और देश के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच नए सुप्रीम लीडर के लिए राह बेहद कठिन है।
क्या बदलेगी ईरान की नीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुज्तबा खामेनेई अमेरिका और इजरायल के प्रति अपने पिता जैसा ही टकराव वाला रुख अपनाएँगे और फिलहाल किसी समझौते या वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। भारत सहित दुनिया के तमाम देश इस घटनाक्रम पर बेहद सतर्कता से नज़र रख रहे हैं क्योंकि मध्यपूर्व की यह उथल-पुथल वैश्विक तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति सभी को गहराई से प्रभावित कर रही है।

















