मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indore) ने एक बार फिर अंगदान और सेवा भाव के क्षेत्र में देश के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। एक सड़क हादसे/असमय दुखद घटना में जान गंवाने वाले स्थानीय किशोर (Teenager) के परिजनों ने गहरे शोक और असीम वेदना के बीच अत्यंत साहसिक निर्णय लेते हुए उसके नेत्रदान (Eye Donation) की सहमति दी।
इस पुण्य कार्य के फलस्वरूप दो दृष्टिहीन व्यक्तियों (Corneal Blind Patients) के जीवन में दोबारा रोशनी और नई उम्मीद की किरण लौटी है।
💔 असीम वेदना के बीच लिया साहसिक फैसला
- दुखद घटना: जानकारी के अनुसार, इंदौर निवासी किशोर को गंभीर स्थिति में शहर के प्रमुख अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ डॉक्टरों के भरसक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
- काउंसलिंग और सहमति: मौत के बाद इंदौर की सामाजिक संस्थाओं (जैसे मुस्कान ग्रुप/लायंस आई बैंक) के स्वयंसेवकों ने शोकाकुल परिवार से संपर्क किया और नेत्रदान के महत्व से अवगत कराया।
- ‘हमारा बच्चा दूसरों की आंखों से दुनिया देखेगा’: परिजनों ने भारी मन से लेकिन दूसरों का जीवन संवारने की सोच के साथ तुरंत अपनी सहमति दी। परिवार के सदस्यों का कहना था कि “हमारा बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन यह सोचकर संतोष मिलता है कि उसकी आँखें दो अन्य लोगों के अंधेरे जीवन को रोशन करेंगी।”
👁️ एमवाय अस्पताल व आई बैंक द्वारा कॉर्निया ट्रांसप्लांट
नेत्रदान की प्रक्रिया शहर की विशेषज्ञ मेडिकल टीम द्वारा पूरी गरिमा के साथ संपन्न की गई:
- किशोर के कॉर्निया (Cornea) को सुरक्षित रूप से रिकवर कर स्थानीय आई बैंक (MY Hospital / Choithram Eye Bank) में भेजा गया।
- परीक्षण के बाद, दोनों स्वस्थ कॉर्निया को कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे दो जरूरतमंद मरीजों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित (Transplant) कर दिया गया।
इंदौर बना अंगदान का गढ़
इंदौर शहर पिछले कुछ वर्षों से ‘अंगदान की राजधानी’ के रूप में उभरा है। यहाँ ग्रीन कॉरिडोर (Green Corridors) के माध्यम से दिल, लिवर, किडनी और कॉर्निया दान कर सैकड़ों लोगों को नया जीवन दिया गया है। इस किशोर के परिवार का यह कदम समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।












