अपनी अद्भुत स्वच्छता संस्कृति और ‘सफाई के सिरमौर’ के रूप में देश भर में पहचाने जाने वाले शहर इंदौर ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता की मिसाल पेश की है। सावन और भादौ मास के दौरान इंदौर से महाकाल की नगरी उज्जैन की ओर रवाना होने वाली विशाल कांवड़ यात्राओं के मार्ग को इंदौर नगर निगम (IMC) की टीम ने यात्रा समाप्त होने के महज 1 घंटे के भीतर पूरी तरह चकाचक साफ कर दिया।
हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के गुजरने के बाद सड़कों पर फैली प्लास्टिक की बोतलों, जलपान के डिस्पोजल, केले के छिलकों और कचरे को त्वरित ‘ज़ीरो-वेस्ट’ मैकेनिज्म के तहत हटाकर यातायात को सुचारू कर दिया गया।
1 घंटे में कैसे हुई कांवड़ यात्रा मार्ग की सफाई? (IMC’s Action Plan)
- बैक-टू-बैक स्वीपिंग मशीनें और सफाई मित्र: महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम आयुक्त के निर्देशों पर नगर निगम की सफाई मित्रों की समर्पित टीमों को यात्रा के ठीक पीछे तैनात किया गया था।
- समानांतर सफाई व्यवस्था: जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई, पीछे-पीछे मशीनीकृत रोड़ स्वीपर और स्वच्छता कर्मियों ने सड़कों पर झाड़ू लगाकर और पानी से धोकर सड़कों को सामान्य स्थिति में ला दिया।
- कचरे का तत्काल पृथक्करण (Segregation): एकत्रित कचरे को सीधे कचरा वाहनों (Garbage Collection Vans) में लोड कर प्रोसेसिंग प्लांट भेजा गया ताकि सड़कों पर जरा भी दुर्गंध या कचरे के ढेर न रहें।
हजारों कांवड़ियों का बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन कूच
- इंदौर से उज्जैन मार्ग पर बोल बम की गूंज: इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे बाणगंगा, सांवेर रोड, मरीमाता चौराहे) से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए पवित्र कांवड़ में जल लेकर उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के लिए पैदल रवाना हो रहे हैं।
- मार्ग में सेवा शिविर: इंदौर प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा कांवड़ियों के विश्राम, भोजन और चिकित्सा के लिए जगह-जगह भव्य सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहाँ स्वच्छता के विशेष मापदंड लागू किए गए हैं।
नागरिकों और श्रद्धालुओं ने की तारीफ
अन्य शहरों में धार्मिक यात्राओं के बाद अक्सर सड़कों पर गंदगी के अंबार लग जाते हैं, लेकिन इंदौर नगर निगम द्वारा महज एक घंटे में पूरे मार्ग को चमका देने की इस पहल की श्रद्धालुओं और शहरवासियों ने जमकर सराहना की है।












