Indore Development Authority Click to open side panel for more information की महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक से ठीक पहले शहर में अहिल्यापथ योजना (Ahilyapath Project) को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया है। रिंजलाय से रेवती गांव तक प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी 15 किलोमीटर लंबे मार्ग और टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत कृषि भूमि अधिग्रहित किए जाने से नाराज 10 से अधिक प्रभावित गांवों के किसान अपनी जमीनों की सुरक्षा और योजना रद्द करने की मांग को लेकर अड़ गए हैं।
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी तीन फसलें देने वाली उपजाऊ कृषि भूमि को विकास प्राधिकरण को नहीं सौंपेंगे।
किसानों के विरोध के मुख्य कारण और मांगें
- 1,179 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित: द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अहिल्यापथ परियोजना के अंतर्गत लगभग 1,179 हेक्टेयर कृषि भूमि शामिल की जा रही है, जिससे 1,000 से अधिक किसान और 200 से अधिक गरीब परिवार सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
- 50% विकसित भूखंड मॉडल नामंजूर: IDA द्वारा भूमि अधिग्रहण के बदले 50% विकसित प्लॉट देने के प्रस्ताव को किसानों ने अपर्याप्त बताया है। किसानों का कहना है कि विकसित प्लॉट मिलने की समय सीमा स्पष्ट नहीं है, जिससे अंतरिम अवधि में उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।
- बाजार दर से 4 गुना मुआवजा या योजना निरस्त हो: किसानों और भारतीय किसान संघ (BKS) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 लागू करने, बाजार दर से चार गुना मुआवजे की मांग करने या इस योजना को पूरी तरह से रद्द करने का अल्टीमेटम दिया है।
IDA बोर्ड बैठक पर टिकी सभी की निगाहें
IDA की आगामी बोर्ड बैठक में अहिल्यापथ योजना के अलावा शहर के अन्य मास्टर प्लान कॉरिडोर और विकास कार्यों के प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाना है। किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन और शहरी विकास विभाग को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे व्यापक स्तर पर धरना प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट घेराव करेंगे।












