मध्यप्रदेश के इंदौर में एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है। 22.88 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घोटाले ने बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर बैंक से भारी-भरकम लोन मंजूर कराया। लोन स्वीकृत होने के बाद रकम का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य जगहों पर कर दिया गया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
EOW की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में कई लोगों की मिलीभगत हो सकती है। इसमें लोन लेने वाले व्यक्ति या फर्म के साथ-साथ बैंक से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी को शक है कि बिना उचित सत्यापन के लोन पास किया गया।
EOW अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत वित्तीय जांच की जा रही है। बैंक रिकॉर्ड, खातों के लेन-देन, संपत्तियों और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आरोपियों से पूछताछ और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
इस घोटाले के सामने आने के बाद बैंकिंग सेक्टर में हलचल मच गई है। आम लोगों में भी यह चिंता है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
EOW ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
















