इंदौर जिला प्रशासन और इंदौर नगर निगम (IMC) ने शहर के बाणगंगाClick to open side panel for more information थाना क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए और बिना अनुमति के संचालित हो रहे एक अवैध वृद्धाश्रम पर बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम के रिमूवल अमले ने पुलिस बल की मौजूदगी में पोकलेन और बुलडोजर की मदद से अवैध निर्माण को ध्वस्त (Demolish) कर दिया।
कार्रवाई से पहले प्रशासन ने वृद्धाश्रम में रह रहे असहाय बुजुर्गों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें शासकीय एवं मान्यता प्राप्त वृद्धाश्रमों में पुनर्वासित (Rehabilitate) किया।
क्यों हुई प्रशासन की यह कड़ी कार्रवाई? (Action Details):
- अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जा: प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह निर्माण शासकीय/ग्रीन बेल की जमीन पर बिना किसी वैध अनुमति और भवन निर्माण नक्शे की स्वीकृति के किया गया था।
- बिना रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मानकों के संचालन: यह संस्थान बिना समाज कल्याण विभाग की अनुमति और बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा था। यहां बुजुर्गों के स्वास्थ्य, भोजन और सुरक्षा के कोई न्यूनतम मानक (Safety Standards) पूरे नहीं किए जा रहे थे।
- शिकायत और नोटिस के बाद कार्रवाई: स्थानीय निवासियों और समाज कल्याण विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने जांच बैठाई थी। नोटिस की समयावधि समाप्त होने के बाद यह संयुक्त बुलडोजर कार्रवाई की गई।
बुजुर्गों का सुरक्षित रेस्क्यू और शिफ्टिंग
कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ी प्राथमिकता वहां रह रहे वृद्धजनों की सुरक्षा थी:
- स्वास्थ्य परीक्षण: प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर मौजूद सभी बुजुर्गों का तत्काल मेडिकल चेकअप किया।
- शासकीय वृद्धाश्रम में शिफ्टिंग: जिला प्रशासन ने सभी वृद्धों को सम्मानपूर्वक शासकीय और पंजीकृत वृद्धाश्रमों (जैसे परदेशीपुरा स्थित वृद्धाश्रम) में शिफ्ट कराया, जहां उन्हें भोजन, चिकित्सा और रहने की समुचित सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
अवैध कब्जाधारियों को सख्त चेतावनी
इंदौर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि शहर में अवैध रूप से चल रहे संस्थानों, बिना अनुमति के सरकारी जमीन पर बने ढांचों और समाज कल्याण के नाम परर्शोषण करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) की कार्रवाई जारी रहेगी।












