कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की EPS-95 स्कीम के तहत न्यूनतम पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है। वर्तमान में पेंशनभोगी और विभिन्न संगठन इस मांग को लेकर काफी सक्रिय हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई है।
फरवरी 2026 के ताजा अपडेट के अनुसार, इस मामले की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
सरकार का रुख: बजट 2026 में क्या हुआ?
1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में पेंशनभोगियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर कोई घोषणा नहीं की है।
| विवरण | ताजा अपडेट (Status as of Feb 2026) |
| वर्तमान न्यूनतम पेंशन | ₹1,000 प्रति माह (वर्ष 2014 से प्रभावी) |
| प्रस्तावित मांग | ₹7,500 प्रति माह + महंगाई भत्ता (DA) |
| सरकार का जवाब | “फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।” |
| मुख्य कारण | फंड की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता (Sustainability) की चुनौती। |
EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) और विभिन्न लेबर यूनियंस का कहना है कि ₹1,000 की पेंशन आज की महंगाई के दौर में एक मजाक है। वे मांग कर रहे हैं कि इसे बढ़ाकर कम से कम ₹7,500 किया जाए और साथ में मुफ्त चिकित्सा सुविधा भी दी जाए।
सरकार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण:
- वित्तीय भार: श्रम मंत्रालय ने संसद में स्पष्ट किया है कि यदि न्यूनतम पेंशन ₹7,500 की जाती है, तो सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। ईपीएस एक ‘योगदान-आधारित’ (Contribution-based) योजना है, और वर्तमान फंड कॉर्पस इतनी बड़ी बढ़ोतरी को वहन करने की स्थिति में नहीं है।
- अतिरिक्त बजटीय सहायता: सरकार पहले से ही ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए हर साल अतिरिक्त बजटीय सहायता प्रदान करती है (मौजूदा 1.16% योगदान के अलावा)।
- एक्चुअरियल रिपोर्ट: सरकार का कहना है कि वे हर साल फंड का ‘एक्चुअरियल मूल्यांकन’ (Actuarial Valuation) करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में पेंशन देने के लिए पर्याप्त फंड बचा रहे।
विशेषज्ञों की राय: हालांकि ₹7,500 पर सहमति नहीं बनी है, लेकिन चर्चाएं हैं कि सरकार न्यूनतम पेंशन को ₹2,000 से ₹3,000 के बीच करने पर विचार कर सकती है, ताकि पेंशनभोगियों को कुछ राहत मिल सके।
















