विंध्य और मालवा की मिट्टी से निकले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बोर्ड परीक्षाओं की दहलीज पर खड़े छात्रों को एक बड़ा भावनात्मक और नैतिक संबल दिया है। 9 फरवरी 2026 को भोपाल के सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में आयोजित ‘परीक्षा पर संवाद-2026’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सफलता केवल अंकों की मोहताज नहीं है और छात्रों को दबाव में आने की जरूरत नहीं है।
| प्रमुख संदेश | मुख्यमंत्री के शब्द (Key Quotes) |
| लक्ष्य पर स्पष्टता | “परीक्षा हमारे जीवन का एक पड़ाव मात्र है, अंतिम लक्ष्य नहीं।” |
| तनाव प्रबंधन | “मेहनत करना आपकी आदत होनी चाहिए, लेकिन तनाव को खुद पर हावी न होने दें।” |
| सफलता की कुंजी | “आत्मविश्वास, अनुशासन और संतुलित दिनचर्या ही जीत का असली मार्ग है।” |
| विफलता का डर | “विफलता से डरने के बजाय उससे सीखकर आगे बढ़ना ही एक मजबूत व्यक्तित्व की पहचान है।” |
मुख्यमंत्री ने एक ‘अभिभावक’ की भूमिका निभाते हुए छात्रों की शंकाओं को दूर किया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया।
संवाद के प्रमुख बिंदु:
- स्वयं पर विश्वास (Self-Belief): डॉ. यादव ने छात्रों से कहा कि वे किसी भी स्थिति में अपना आत्मविश्वास न खोएं। उन्होंने जोर दिया कि आज के छात्र ही कल के भारत का नेतृत्व करेंगे, इसलिए उन्हें अपने कौशल (Skills) और प्रदर्शन में निरंतर सुधार करना चाहिए।
- डर नहीं, डटकर सामना: उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या उन्हें परीक्षा से डर लगता है? जब छात्रों ने सकारात्मक उत्तर दिया, तो सीएम ने सलाह दी कि परीक्षा को एक उत्सव की तरह लें। “डरकर नहीं, डटकर आगे बढ़ें,” उनका यह जुमला छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
- समय प्रबंधन और नींद: मुख्यमंत्री ने व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने एक निश्चित स्टडी शेड्यूल बनाने और केवल रटने के बजाय विषयों को समझने व उन पर दोस्तों-शिक्षकों से चर्चा करने की सलाह दी।
- अभिभावकों के लिए संदेश: सीएम ने माता-पिता से भी अपील की कि वे बच्चों पर अंकों का अनावश्यक दबाव न बनाएं, बल्कि उनके साथ नियमित संवाद बनाए रखें ताकि वे तनावमुक्त होकर अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें।

















