मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “स्व-सहायता समूहों की आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला” में शिरकत करते हुए वहां लगाए गए दीदियों के स्टॉल्स का विस्तार से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मुलाकात की, उनके उत्पादों को करीब से देखा और उनके काम की सराहना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रदेश की उन लाखों दीदियों के लिए एक बड़े उत्साह और प्रेरणा का क्षण बन गया जो अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भरता की राह पर चल रही हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य — दीदियों को मिले सही मंच और बाजार
आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups) की महिलाओं को उनके उत्पादों की बिक्री, विपणन और व्यवसायिक कौशल में निखार लाना है। इस कार्यशाला के माध्यम से दीदियों को यह समझाया गया कि वे अपने हाथों से बनाए गए उत्पादों को स्थानीय बाजार से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कैसे पहुंचा सकती हैं।
कार्यशाला में प्रदेश के कई जिलों से आई हजारों स्व-सहायता समूहों की महिला सदस्यों ने भाग लिया। हर समूह ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन स्टॉल्स के माध्यम से किया।
दीदियों के स्टॉल्स पर क्या था खास?
कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में लगाए गए स्टॉल्स पर प्रदेश की विभिन्न जिलों की दीदियों ने अपने हाथों से बनाए हुए तरह-तरह के उत्पाद प्रदर्शित किए। इनमें शामिल थे —
- हस्तशिल्प और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद — बांस, मिट्टी और कपड़े से बनी कलाकृतियां
- जैविक और प्राकृतिक खाद्य उत्पाद — अचार, मुरब्बा, मसाले, दाल और अनाज
- हथकरघा और वस्त्र उत्पाद — साड़ियां, चादर, दुपट्टे और पारंपरिक पोशाकें
- महुआ, शहद और वनोपज आधारित उत्पाद
- सजावट और गृहसज्जा के सामान
- आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हर स्टॉल पर रुककर दीदियों से उनके उत्पादों के बारे में जानकारी ली और उनके काम को सराहा।
CM ने दीदियों से की सीधी बात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से सीधी बातचीत की। उन्होंने दीदियों से पूछा कि वे किन चुनौतियों का सामना करती हैं और सरकार उनकी किस तरह मदद कर सकती है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि —
“प्रदेश की दीदियां आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की असली ताकत हैं। उनके हाथों में वह हुनर है जो न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे प्रदेश को समृद्ध बना सकता है। सरकार हर कदम पर उनके साथ है।”
आजीविका मिशन — प्रदेश की महिलाओं का सबसे बड़ा सहारा
मध्यप्रदेश आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में लाखों स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं —
- बैंक से ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर रही हैं
- सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा रही हैं
- अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेच रही हैं
- राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय मेलों में भाग लेकर अपनी पहचान बना रही हैं
- परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं
महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार महिला सशक्तिकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक मानती है। लाडली बहना योजना से लेकर आजीविका मिशन तक, सरकार की हर योजना का केंद्र महिलाएं हैं। इस कार्यशाला जैसे आयोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि दीदियों को न केवल आर्थिक मदद मिले, बल्कि वे कौशल और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
दीदियों की प्रतिक्रिया
कार्यशाला में शामिल हुई स्व-सहायता समूहों की महिलाओं में मुख्यमंत्री के आगमन और उनके स्टॉल्स देखने से जबरदस्त उत्साह था। कई दीदियों ने कहा कि मुख्यमंत्री का इस तरह खुद आकर उनका काम देखना उनके लिए एक बड़ी हिम्मत और प्रोत्साहन है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का मुखिया उनके उत्पादों में रुचि लेता है तो उनका आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है।















