देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना यानी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) के निर्माण का रास्ता और साफ हो गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) को मुंबई और पालघर जिले में परियोजना के निर्माण के लिए 847 मैंग्रोव (मैंग्रोव/कच्छ वनस्पति) के पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी है।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय महत्व की इस बुनियादी ढांचा परियोजना के महत्व को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। हालांकि, अदालत ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद तल्ख और महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “अन्यत्र पौधारोपण से स्थानीय इकोसिस्टम की भरपाई नहीं”
सुनवाई के दौरान अदालत ने एनएचएसआरसीएल और पर्यावरण अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत देते हुए कहा:
- स्थानीय पर्यावरण का स्थान कोई नहीं ले सकता: बॉम्बे हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी परियोजना के लिए स्थानीय मैंग्रोव या पेड़ों को नष्ट कर शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी अन्य जिले में क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) करना स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Local Ecology) के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।
- प्रति वृक्ष 5 पौधे लगाने की शर्त: अदालत ने एनएचएसआरसीएल को सख्त निर्देश दिया है कि वह काटे जाने वाले प्रत्येक मैंग्रोव वृक्ष के बदले कम से कम 5 नए मैंग्रोव के पौधे (1:5 के अनुपात में) उसी तटीय/पारिस्थितिक क्षेत्र में लगाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
- कम से कम नुकसान की नीति: एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान केवल उन्हीं पेड़ों या मैंग्रोव को हटाया जाए जो मार्ग के लिए अत्यंत अनिवार्य हैं।
📌 बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए क्यों अहम है यह मंजूरी?
- ठाणे क्रीक और पालघर सेक्शन: बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा ठाणे क्रीक (Thane Creek) और पालघर के तटीय इलाकों से होकर गुजरता है, जहां भूमिगत सुरंग और वियाडक्ट (Viaducts) का निर्माण किया जा रहा है।
- अंतिम चरण की अनुमतियां: एनएचएसआरसीएल ने अदालत को बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) की मंजूरियां पहले ही प्राप्त की जा चुकी हैं। मैंग्रोव संरक्षण से जुड़े बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों के कारण एजेंसी को पेड़ काटने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता थी।
पर्यावरणविदों की चिंता और संतुलन की चुनौती
मुंबई और आसपास के तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव बाढ़ नियंत्रण, समुद्री कटाव रोकने और तटीय जैव विविधता को बचाने में ढाल का काम करते हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले से जहां एक ओर देश की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना की गति तेज होगी, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच की चुनौती एक बार फिर चर्चा में आ गई है।












