राजधानी भोपाल में प्रस्तावित 7 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यावरणीय मानकों और वैधानिक प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता, तब तक किसी भी तरह की कटाई नहीं की जा सकती।
पर्यावरणीय मंजूरी पर उठे सवाल
NGT के समक्ष दायर याचिका में यह तर्क दिया गया था कि प्रस्तावित परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) और वैकल्पिक हरित उपायों को लेकर गंभीर खामियां हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से भोपाल के पर्यावरण, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
ट्रिब्यूनल का सख्त रुख
मामले की सुनवाई के दौरान NGT ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बिना संतोषजनक जवाब और स्पष्ट योजना के हजारों पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट और जवाब भी तलब किए हैं।
पर्यावरण प्रेमियों ने फैसले का किया स्वागत
NGT के इस आदेश के बाद पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि भोपाल पहले से ही प्रदूषण और हरियाली घटने की समस्या से जूझ रहा है, ऐसे में यह फैसला भविष्य के लिए बेहद अहम है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
NGT की रोक के बाद अब प्रशासन को न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करना होगा कि यदि परियोजना जरूरी है तो कितने पेड़ बचाए जाएंगे और कितने नए पेड़ लगाए जाएंगे। फिलहाल, ट्रिब्यूनल के अगले आदेश तक पेड़ कटाई पूरी तरह बंद रहेगी।

















