मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक गंभीर वाकया सामने आया है। एक युवक ने अपनी जिज्ञासा और लापरवाही के चलते एक जंगली चीतल को सीधे अपने हाथों से केला खिलाया। यह कृत्य न केवल जंगली जानवरों से संबंधित कानूनों का सीधा उल्लंघन है, बल्कि वाइल्डलाइफ सेंचुरी के नियमों का भी स्पष्ट उल्लंघन है। रिजर्व प्रशासन ने इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया है और भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की धारा के तहत आवश्यक कार्रवाई शुरू की है। इस वाकये ने एक बार फिर से उजागर किया है कि जंगली जानवरों से सीधे संपर्क कितना खतरनाक हो सकता है और वन सुरक्षा के नियमों का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार, यह घटना सोमवार को दिन के समय घटित हुई। एक युवक, जिसकी पहचान अभी रिजर्व प्रशासन द्वारा की जा रही है, वह रिजर्व के एक open area में घूम रहा था जहाँ चीतल (एक प्रकार का हिरन) चर रहे थे। बिना किसी भय के और स्पष्ट रूप से रिजर्व के नियमों को भूलकर, युवक ने अपनी बैग से केला निकाला और एक चीतल को सीधे अपने हाथों से खिलाने का प्रयास किया। इस दौरान कई पर्यटक और अन्य लोग मौजूद थे जिन्होंने इस घटना को देखा और रिजर्व अधिकारियों को तुरंत सूचित किया। रिजर्व के गश्ती दल ने तुरंत घटना स्थल पर पहुँचकर युवक को रोका और उसकी जानकारी दर्ज की।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) भारत का सबसे महत्वपूर्ण कानून है जो जंगली जानवरों और वनस्पतियों की सुरक्षा करता है। इस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत, किसी को भी tiger reserves, national parks और sanctuaries में जानवरों को सीधे खाना खिलाना या उन्हें distress देना सख्त मना है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नियमों के अनुसार, रिजर्व के अंदर आने वाले पर्यटकों और आगंतुकों को निर्धारित दूरी बनाए रखनी होती है और किसी भी जानवर को खाना या सामान नहीं देना चाहिए। इस वाकये में, रिजर्व प्रशासन ने युवक के खिलाफ Wildlife Protection Act की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगर पुष्टि हो जाए तो युवक को कानूनी सजा के साथ-साथ जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
चीतल (Axis Deer) भारतीय उपमहाद्वेश में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण जंगली जानवर है। इसे सांभर भी कहा जाता है और यह Cervidae परिवार का सदस्य है। चीतल आमतौर पर शांत स्वभाव का होता है, लेकिन जब इसे अजनबियों द्वारा सीधे हस्तक्षेप किया जाता है या अप्रत्याशित वस्तुएं दी जाती हैं, तो यह आक्रामक भी हो सकता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चीतल की एक बड़ी आबादी है और ये रिजर्व के इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बाहरी खाने (जैसे केला) को खाने से चीतलों का पाचन तंत्र गड़बड़ा सकता है और उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, जब जंगली जानवर इंसानों से सीधे खाना लेने लगते हैं, तो वे अधिक dependent हो जाते हैं और कभी-कभी आक्रामक भी हो सकते हैं।












