मध्य प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों संगठनात्मक फेरबदल और ‘मिशन 2028’ की तैयारियों को लेकर भारी हलचल है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रभारी हरीश चौधरी की अगुवाई में पार्टी “सर्जरी” के दौर से गुजर रही है। हाल ही में राहुल गांधी की नाराजगी और कड़े निर्देशों के बाद संगठन में कई कड़े फैसले लिए गए हैं।
यहाँ इस मंथन के मुख्य बिंदु और विश्लेषण दिया गया है:
एमपी कांग्रेस: संगठन में बड़े बदलाव (ताजा अपडेट)
| क्षेत्र | प्रमुख बदलाव/एक्शन |
| प्रवक्ता मंडल | सभी पुराने प्रवक्ताओं को कार्यमुक्त कर ‘टैलेंट हंट’ के जरिए नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू। |
| जिला कार्यकारिणी | सागर, छिंदवाड़ा और मऊगंज समेत कई जिलों की नई कार्यकारिणी घोषित; निष्क्रिय प्रभारियों की छुट्टी। |
| अनुशासन | पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करने वालों पर सख्त कार्रवाई का अल्टीमेटम। |
| अभियान | “गांव-गांव चलो” अभियान के जरिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की रणनीति। |
कांग्रेस के इस नए अवतार को लेकर राजनीतिक गलियारों में दो तरह की चर्चाएं हैं:
1. वास्तविक बदलाव की कोशिश: लगातार चुनावी हार के बाद, जीतू पटवारी की नई टीम ‘परफॉर्म या पेरिश्’ (काम करो या पद छोड़ो) के सिद्धांत पर काम कर रही है। राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल उन्हीं नेताओं को पद मिलेगा जो जमीन पर सक्रिय रहेंगे। 18 जिलों में नए संगठन महासचिवों की नियुक्ति और 14 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों का बदलाव यह बताता है कि पार्टी अब ‘युवा और सक्रिय’ चेहरों पर दांव लगा रही है।
2. गुटीय राजनीति का साया (नूरा-कुश्ती): आलोचकों का तर्क है कि हर बार हार के बाद ऐसी बैठकें होती हैं, लेकिन अंत में पदों का बंटवारा बड़े क्षत्रपों (दिग्विजय सिंह, कमलनाथ आदि) के बीच ‘बैलेंसिंग एक्ट’ बनकर रह जाता है। हालिया नियुक्तियों में भी ‘असंतुष्टों को साधने’ की कोशिश देखी गई है, जो अक्सर वास्तविक सुधार की राह में रोड़ा बनती है।
3. टैलेंट हंट का प्रयोग: प्रवक्ताओं को हटाने और नए सिरे से इंटरव्यू के माध्यम से चयन करने की प्रक्रिया को पार्टी एक पारदर्शी कदम बता रही है। इसका उद्देश्य ऐसे वक्ताओं को लाना है जो टीवी और सोशल मीडिया पर भाजपा के नैरेटिव का प्रभावी जवाब दे सकें।
















