राज्य शासन ने शासकीय आवास (Government Accommodation) के आवंटन और रिक्त करने के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नए कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब सेवानिवृत्त (Retired) या स्थानांतरित (Transferred) कर्मचारी केवल 6 माह तक ही सरकारी मकान में रह सकेंगे, वह भी कुछ विशेष शर्तों के साथ। इसके बाद, नियमों का उल्लंघन करने पर प्रशासन द्वारा सख्ती से बेदखली (Eviction) की कार्रवाई की जाएगी।
| स्थिति (Status) | अनुमति की अवधि (Allowed Period) | शर्त (Conditions) |
| सेवानिवृत्ति (Retirement) | अधिकतम 6 माह | सामान्य किराया (4 माह) + बाजार दर (2 माह)। |
| स्थानांतरण (Transfer) | अधिकतम 6 माह | यदि बच्चों की शिक्षा सत्र के बीच में हो। |
| डेथ केस (Death) | 1 वर्ष तक | परिवार को राहत देने के उद्देश्य से। |
| बेदखली (Eviction) | 6 माह बाद तुरंत | पुलिस बल के साथ कब्जा खाली कराया जाएगा। |
मुख्य निर्देश और शर्तें (Details and Conditions)
शासन ने यह कदम आवासों की भारी कमी और लंबे समय तक कब्जा जमाए रखने वाले पूर्व कर्मचारियों की शिकायतों के बाद उठाया है।
1. 6 माह की समय-सीमा: रिटायर्ड या ट्रांसफर हुए कर्मचारी को पहले 4 महीने तक सामान्य लाइसेंस फीस (किराया) पर रहने की अनुमति होगी। यदि वह अगले 2 महीने और रहना चाहता है, तो उसे ‘बाजार दर’ (Market Rate) या दंड स्वरूप अतिरिक्त किराया चुकाना होगा। 6 महीने पूरे होते ही आवास की पात्रता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
2. शिक्षा के आधार पर छूट: स्थानांतरित कर्मचारियों के मामले में, यदि उनके बच्चे कक्षा 10वीं या 12वीं में पढ़ रहे हैं और सत्र के बीच में ट्रांसफर हुआ है, तो वे शैक्षणिक सत्र समाप्त होने तक (अधिकतम 6 माह) आवास में रह सकते हैं। इसके लिए विभागाध्यक्ष का प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
3. सख्त बेदखली प्रक्रिया (Eviction Process):
“6 माह की अवधि समाप्त होने के 15 दिन पहले विभाग द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा। समय सीमा खत्म होने के बाद यदि आवास खाली नहीं होता है, तो संबंधित जिले के कलेक्टर/संपदा अधिकारी पुलिस बल की मदद से सामान बाहर कर आवास को सील कर देंगे।”
4. ग्रेच्युटी और पेंशन पर असर: नए निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कर्मचारी निर्धारित समय में आवास खाली नहीं करता है, तो उसके ग्रेच्युटी (Gratuity) भुगतान से बकाया किराया वसूला जाएगा और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हजारों पात्र कर्मचारी आवास आवंटन के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं, जबकि सैकड़ों आवासों पर ऐसे लोग काबिज हैं जिनका ट्रांसफर वर्षों पहले हो चुका है या जो रिटायर हो चुके हैं।
प्रमुख कारण:
- आवास की कमी: नए भर्ती हुए कर्मचारियों और अधिकारियों को सिर छिपाने के लिए निजी मकानों में भारी किराया देना पड़ रहा है।
- रखरखाव में समस्या: अवैध रूप से काबिज लोग अक्सर आवास के रख-रखाव पर ध्यान नहीं देते, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँच रहा है।
- पारदर्शिता: नए नियमों से आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और ‘पावर’ या ‘पहुँच’ के दम पर सालों तक कब्जा बनाए रखने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी। [Image representing administrative transparency with a gavel and a house icon]

















