बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मेयर’ पद को लेकर महायुति गठबंधन (BJP, शिंदे सेना और अजित पवार गुट) के बीच खींचतान तेज हो गई है। 16 जनवरी 2026 को आए नतीजों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के लिए उसे सहयोगियों की जरूरत है।
इसी बीच अजित पवार गुट (NCP) के कद्दावर नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मेयर पद को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे गठबंधन के भीतर नया समीकरण बनता दिख रहा है।
भले ही महायुति के पास बहुमत है, लेकिन अंदरूनी कलह ने मामला उलझा दिया है।
विवाद के मुख्य कारण:
- भाजपा की जिद: भाजपा 45 साल में पहली बार अपने दम पर मेयर बनाने के करीब है। उनके नेता आशीष शेलार और देवेंद्र फडणवीस “भाजपा का मेयर” होने की बात दोहरा रहे हैं।
- शिंदे का ‘इमोशनल कार्ड’: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने पार्षदों को होटल (Taj Lands End) में शिफ्ट कर चुके हैं। वे चाहते हैं कि कम से कम ढाई साल के लिए मेयर शिवसेना (शिंदे) का हो।
- अजित पवार का संतुलन: अजित पवार इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। उनका बयान भाजपा की ओर झुका हुआ लग रहा है, जिससे शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष: अजित पवार गुट के इस बयान ने भाजपा को राहत दी है, लेकिन शिंदे गुट की नाराजगी गठबंधन के लिए भविष्य में खतरा बन सकती है। अब सबकी नजरें मंत्रालय में होने वाले लॉटरी ड्रा और नए मेयर आरक्षण पर टिकी हैं।















