बिहार में मकर संक्रांति केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का जरिया भी है। 14 जनवरी 2026 को तेजप्रताप यादव अपने पटना स्थित आवास पर एक भव्य भोज आयोजित कर रहे हैं। इस आयोजन ने इसलिए सुर्खियां बटोरी हैं क्योंकि तेजप्रताप ने इसमें अपने भाई तेजस्वी यादव और पिता लालू यादव के अलावा एनडीए (NDA) के बड़े नेताओं को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है।
| आमंत्रित नेता | पद/दल | स्टेटस |
| दीपक प्रकाश | मंत्री (बिहार सरकार) | व्यक्तिगत रूप से न्योता दिया |
| विजय कुमार सिन्हा | उप-मुख्यमंत्री (BJP) | मिलकर कार्ड सौंपा और मोबाइल नंबर साझा किया |
| नीतीश कुमार | मुख्यमंत्री (JDU) | निमंत्रण भेजने की तैयारी |
| तेजस्वी यादव | नेता प्रतिपक्ष (RJD) | औपचारिक न्योता भेजने की बात कही |
राजद से निष्कासन और 2025 के विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी (JJD) की हार के बाद, तेजप्रताप यादव अब अपनी नई सियासी पहचान बनाने में जुटे हैं। उनके इस कदम को तेजस्वी यादव के प्रभाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हलचल के मुख्य कारण:
- परंपरा पर कब्जा: लालू यादव के अस्वस्थ होने और तेजस्वी के पारंपरिक भोज में कम रुचि दिखाने के कारण, तेजप्रताप ने इस विरासत को लपक लिया है। वे खुद को लालू यादव का ‘असली उत्तराधिकारी’ (रीति-रिवाजों के मामले में) दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
- बीजेपी से बढ़ती नजदीकियां: डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा से उनकी हालिया मुलाकात और नंबरों का आदान-प्रदान यह संकेत दे रहा है कि तेजप्रताप एनडीए के साथ नए समीकरण तलाश रहे हैं। केंद्र द्वारा उन्हें दी गई Y+ सिक्योरिटी पहले ही इस चर्चा को बल दे चुकी है।
- कांग्रेस पर निशाना: इसी दौरान उन्होंने प्रियंका गांधी को राहुल गांधी से अधिक काबिल बताकर कांग्रेस और राजद के गठबंधन पर भी कटाक्ष किया है।
निष्कर्ष: जहाँ तेजस्वी यादव विकास और रोजगार के मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं, वहीं तेजप्रताप ‘दही-चूड़ा’ जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए उन सभी नेताओं को एक मंच पर लाना चाहते हैं जो फिलहाल तेजस्वी के विरोधी हैं। यदि 14 जनवरी को एनडीए के दिग्गज उनके घर पहुँचते हैं, तो यह तेजस्वी यादव के लिए एक बड़ी सियासी चुनौती होगी।















