राज्य प्रशासन में विवादों का शोर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आईएएस संतोष वर्मा के बाद अब आईएएस मीनाक्षी सिंह का एक विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में फिर हलचल पैदा कर दी है।
मीनाक्षी सिंह, जो अक्सर अपने स्पष्ट और सीधी बातों के कारण चर्चा में रहती हैं, ने एक सभा में दिए गए बयान में कहा कि “प्रशासनिक कार्य केवल नियम और आदेश तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जनता की भावनाओं और अपेक्षाओं को समझकर काम करना भी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में अधिकारी कानूनी ढांचे से हटकर निर्णय लेने में हिचकिचा रहे हैं, जिससे जनसेवा प्रभावित हो रही है।
हालांकि, उनके इस बयान का कई लोगों ने स्वागत किया है, वहीं आलोचक यह कह रहे हैं कि एक वरिष्ठ अधिकारी का ऐसा बयान उचित प्रशासनिक संवाद का हिस्सा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे बयान प्रशासन के निष्पक्ष संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मीनाक्षी सिंह यह भी जोड़ती दिख रही हैं कि “कानून का सम्मान सबको करना चाहिए, लेकिन नियमों की कठोरता और मनुष्य के बीच संतुलन बनाना प्रशासन का कलायोग्य काम है।”
राजनीतिक दलों और नागरिकों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। एक ओर कुछ का कहना है कि अधिकारियों को भी जनहित और अपेक्षाओं के संदर्भ में बोलने का अधिकार होना चाहिए, तो दूसरी ओर कुछ का मानना है कि अधिकारी सार्वजनिक बयानबाजी में राजनीतिक रेखा को नहीं पार करें।
अधिकारिक स्तर से अभी तक कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रशासन के आला अधिकारी मामले की समीक्षा करेंगे। यह मामला कुछ समय तक चर्चा में बना रह सकता है क्योंकि इससे प्रशासनिक स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस छिड़ी है।














