इंदौर विकास प्राधिकरण (Indore Development Authority – IDA) में लालफीताशाही (Red Tapism) और फाइलों को अटकाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सीईओ (CEO) ने कड़ा रुख अपनाया है। भूखंड/लीज अथवा संपत्ति हस्तांतरण (NOC/Property Transfer) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल को करीब 20 महीने तक अटकाने और दबाकर रखने के मामले मेंIDA प्रशासन ने जिम्मेदार क्लर्क (लिपिक) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके वेतन भुगतान रोकने (Pay Withheld/Deduction) के आदेश जारी किए हैं।
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि आम जनता को परेशान करने वाली इस तरह की लापरवाही और देरी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला और क्यों हुई कार्रवाई?
- 20 महीने से अटकी थी फाइल: एक आवेदक ने IDA में लीज नवीनीकरण/एनओसी से संबंधित फाइल लगाई थी। नियमानुसार इसका समाधान समय सीमा (Service Guarantee Act) में होना था, लेकिन संबंधित लिपिक ने बिना किसी ठोस कारण के फाइल को 20 महीने तक दबाए रखा।
- आवेदक की शिकायत पर जांच: आवेदक द्वारा बार-बार चक्कर काटने के बाद जब मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की गई, तो फाइल ट्रैकिंग और जांच में क्लर्क की सीधी लापरवाही सामने आई।
- वेतन रोकने और कारण बताओ नोटिस: IDA सीईओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए क्लर्क के वेतन रोकने का आदेश दिया और कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर विभागीय जांच शुरू की है।
IDA प्रशासन की सख्त चेतावनी
इंदौर विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी विभागों और शाखा प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
- लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय समय सीमा में नागरिकों की फाइलों का निपटारा किया जाए।
- फाइलों को बेवजह अटकाने या जानबूझकर देरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भविष्य में निलंबन (Suspension) जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।












