मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जहाँ नदियों और नालों को उफान पर ला दिया है, वहीं राज्य की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली के बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) की पोल भी खोल कर रख दी है। प्रदेश भर के 230 से अधिक भवन-विहीन (Building-less) सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में बारिश के कारण नियमित कक्षाएं पूरी तरह ठप या प्रभावित हो गई हैं।
हर वर्ष मानसून का आगमन इन स्कूलों में पढ़ने वाले ग्रामीण और वंचित वर्ग के मासूम बच्चों के लिए शिक्षा में बड़ा व्यवधान लेकर आता है।
खुले आसमान या तिरपाल के सहारे चलने वाले स्कूलों पर मार
- पेड़ों के नीचे और बरामदों में लगती हैं क्लास: प्रदेश के कई आदिवासी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों (जैसे डिंडोरी, छिंदवाड़ा, मंडला, श्योपुर और बैतूल) में दर्जनों ऐसे प्राथमिक स्कूल हैं, जिनकी अपनी कोई पक्की इमारत या कमरे नहीं हैं। आम दिनों में ये स्कूल गांव के किसी सामुदायिक भवन, पीपल के पेड़ के नीचे, मंदिर के चबूतरे या तिरपाल डालकर चलाए जाते हैं।
- बारिश में बंद करने के सिवा विकल्प नहीं: मूसलाधार बारिश और जलभराव (Waterlogging) शुरू होते ही ऐसे परिसरों में बच्चों का बैठना असंभव हो जाता है। न तो बच्चों के पास बैठने के लिए सूखी जगह बचती है और न ही किताबों को भीगने से बचाने का कोई उपाय रहता है।
किराए की इमारतों और जर्जर भवनों की भी स्थिति चिंताजनक
- जर्जर इमारतों में छत टपकने का खतरा: भवन-विहीन स्कूलों के अलावा, सैकड़ों ऐसे सरकारी स्कूल हैं जो जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने और प्लास्टर गिरने के डर से शिक्षकों को मजबूरन छुट्टी घोषित करनी पड़ती है या छात्रों को एक ही सुरक्षित कमरे में बैठाना पड़ता है।
- शौचालय और पेयजल संकट: बारिश के दौरान खुले में या अस्थायी व्यवस्था के तहत चल रहे इन स्कूलों में पेयजल और साफ-सफाई की बुनियादी सुविधाएं न होने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
अभिभावकों की मांग और विभाग का रुख
ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों और शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार एक तरफ ‘स्कूल चलें हम’ और ‘सीएम राइज स्कूल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, लेकिन दूसरी तरफ राज्य के बुनियादी प्राथमिक स्कूलों में पक्के कमरों की कमी बच्चों के भविष्य पर पानी फेर रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सभी भवन-विहीन और क्षतिग्रस्त इमारतों वाले स्कूलों का सर्वे कराया जा रहा है, और निकटतम पंचायत भवनों या अन्य शासकीय भवनों में अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।












