पवित्र श्रावण (सावन) मास 2026 की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश का कोना-कोना भगवान शिव की भक्ति में लीन हो गया है। राज्य के विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों—उज्जैन के श्री महाकालेश्वर और खंडवा स्थित ओंकारेश्वर-अमलेश्वर सहित सभी प्रमुख शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
इसी के साथ प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पवित्र नदियों (नर्मदा व शिप्रा) से जल भरकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्राएं (Kanwar Yatra) भी भव्य रूप से शुरू हो चुकी हैं।
प्रमुख मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़:
- श्री महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन): सावन के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती और विशेष शृंगार दर्शन के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं। जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की है।
- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर का जलाभिषेक किया।
- भोजपुर (भोपाल/रायसेन): विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध प्राचीन भोजपुर मंदिर में भी तड़के से ही कई किलोमीटर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं।
भोपाल और इंदौर से कांवड़ यात्राओं का आगाज:
- भोपाल से नर्मदापुरम यात्रा: राजधानी भोपाल के विभिन्न शिव सेवा मंडलों द्वारा नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के लिए विशाल कांवड़ यात्राएं निकाली जा रही हैं। कांवड़िये मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पदयात्रा करते हुए वापस भोपाल पहुंचेंगे और सावन सोमवार को प्रमुख मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे।
- निमाड़ व मालवा अंचल: इंदौर, देवास, धार और खरगोन जिलों से कांवड़ियों के जत्थे ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ ओंकारेश्वर और उज्जैन की ओर रवाना हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री और प्रशासन का बयान:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को सावन मास की बधाई देते हुए सभी तीर्थ स्थलों और कांवड़ यात्रा मार्गों पर पेयजल, सुरक्षा, स्वास्थ्य और पार्किंग की माकूल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन ने कांवड़ियों से नदी तटों और यात्रा मार्गों पर सावधानी बरतने की अपील की है।












