पारिवारिक विवाद और बच्चे की कस्टडी (Child Custody Case) से जुड़े एक अनोखे मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ (High Court Indore Bench) ने बच्चे के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 8 वर्षीय बच्ची की कस्टडी पिता को सौंपने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान जब जज ने बंद कमरे में बच्ची से उसकी इच्छा जानी, तो बच्ची ने कोर्ट को बताया कि उसकी मां सारा दिन मोबाइल फोन और सोशल मीडिया में व्यस्त रहती है, जिससे उसकी पढ़ाई और देखभाल प्रभावित होती है।
हाई कोर्ट ने डिजिटल एडिक्शन (Digital Addiction) और बच्चे के परवरिश पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला दिया।
कोर्ट रूम में क्या हुआ? (Case Details):
- पति-पत्नी के बीच चल रहा था विवाद: दंपत्ति के बीच आपसी अनबन के बाद मां अपनी 8 साल की बेटी को लेकर अलग रहने लगी थी। इसके बाद पिता ने बच्ची की कस्टडी और संरक्षण के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
- जज ने चैंबर में की बच्ची से बातचीत: कस्टडी से जुड़े मामलों में बच्चे की मानसिक स्थिति और इच्छा जानने की प्रक्रिया के तहत जस्टिस ने बच्ची से अकेले में बातचीत की।
- बच्ची का मासूम और चौंकाने वाला जवाब: बच्ची ने जज के सामने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “मां ज्यादातर समय मोबाइल देखने और चैट करने में बिताती है। वह मेरी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देती और मुझे अकेला महसूस होता है। मैं अपने पिता के साथ रहना चाहती हूं क्योंकि वे मेरी देखभाल करते हैं।”
हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी:
अदालत ने बच्ची के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि:
- बाल कल्याण सर्वोपरि (Welfare of Child): कस्टडी मामलों में केवल कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि बच्चे का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास (Emotional Well-being) सबसे महत्वपूर्ण मानदंड होता है।
- अत्यधिक स्क्रीन टाइम का प्रभाव: मां द्वारा मोबाइल फोन पर अत्यधिक समय बिताने से बच्ची की देखभाल में लापरवाही (Neglect) की बात सामने आई है, जो कि विकासशील उम्र में बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
- पिता को मिली कस्टडी, मां को मुलाकात का अधिकार: कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी पिता को सौंपते हुए मां को समय-समय पर मिलने (Visiting Rights) की अनुमति दी है ताकि बच्ची को मां के स्नेह से पूरी तरह वंचित न होना पड़े।
आधुनिक दौर में परिवारों के लिए बड़ा सबक
इंदौर हाई कोर्ट का यह फैसला आधुनिक डिजिटल युग में माता-पिता और बच्चों के रिश्तों के बीच घटते संवाद और स्मार्टफोन की लत (Smartphone Addiction) के दुष्प्रभावों को उजागर करता है। कोर्ट के इस फैसले की शहर भर में काफी चर्चा हो रही है।












