कतर की राजधानी दोहा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के रहते हुए “ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेहरान के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन पर कूटनीतिक वार्ताओं में ‘दुविधापूर्ण और दोहरे रवैये’ (Duplicitous Approach) का आरोप लगाया।
ट्रंप के भाषण के 3 प्रमुख और कड़े बिंदु:
- ‘बातचीत का नाटक और पर्दे के पीछे संवर्धन’: राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरानी नेतृत्व एक तरफ वैश्विक मंचों पर कूटनीतिक शांति की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ गुप्त रूप से अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के स्तर को खतरनाक सीमा तक बढ़ा रहा है।
- अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट का हवाला: ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों को अपने प्रमुख परमाणु ठिकानों (जैसे नतांज और फोर्डो) की पूरी जांच नहीं करने दे रहा है, जो उनके गुप्त इरादों को उजागर करता है।
- सख्त प्रतिबंधों और सैन्य विकल्प की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि यदि तेहरान ने अपना परमाणु एजेंडा बंद नहीं किया, तो अमेरिका उस पर अब तक के सबसे सख्त आर्थिक प्रतिबंध (Economic Sanctions) लागू करेगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प (Military Action) भी मेज से बाहर नहीं है।
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ा तनाव
राष्ट्रपति ट्रंप के इस आक्रामक बयान के बाद तेहरान और मध्य पूर्व में तनाव की नई लहर दौड़ गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप की टिप्पणियों का खंडन करते हुए कहा है कि उनका परमाणु कार्यक्रम विशुद्ध रूप से शांतिपूर्ण और नागरिक ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के इस कड़े रुख से क्षेत्र में किसी नए भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट के बादल मंडराने लगे हैं।












