मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक हैरान कर देने वाली तस्वीर डिंडोरी जिले के सरकारी अस्पताल से सामने आई है। अस्पताल में भर्ती एक मरीज को मेडिकल ड्रिप बॉटल (IV Dripping System) की जगह पानी की प्लास्टिक बोतल (Mineral Water Bottle) में दवा/ड्रिप बनाकर टांग दी गई और मरीज की नस में चढ़ा दी गई। इस गंभीर लापरवाही का वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के ‘स्वास्थ्य मॉडल’ पर करारा हमला बोला है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने इस घटना का वीडियो/तस्वीर साझा करते हुए भाजपा सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लिया है।
“भाजपा का स्वास्थ्य मॉडल वेंटिलेटर पर” — अरुण यादव का तीखा ट्वीट
डिंडोरी जिला अस्पताल के इस शर्मनाक मामले को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया (X/ट्विटर) पर ट्वीट करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने ट्वीट कर लिखा:
“सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं से नहीं, केवल अपने प्रचार से मतलब है। डिंडोरी के सरकारी अस्पताल में पानी की बोतल से ड्रिप चढ़ रही है। यही है भाजपा के डबल इंजन का ‘स्वास्थ्य मॉडल’। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं और सरकार अपने प्रचार में मस्त है। प्रदेश की जनता इलाज नहीं, बदहाली झेल रही है।”
अस्पताल प्रशासन में हड़कंप, जांच के आदेश
सरकारी अस्पताल में सामान्य ग्लूकोज/NS की मानक बोतलों की जगह मिनरल वॉटर की लोकल प्लास्टिक बोतल का इस्तेमाल मरीज की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। इस लापरवाही के सामने आते ही:
- कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी: डिंडोरी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा है।
- कांग्रेस का जिला स्तर पर प्रदर्शन: स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डिंडोरी अस्पताल परिसर में विरोध जताते हुए दोषी स्वास्थ्यकर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की मांग की है।
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल
राजधानी भोपाल से लेकर सुदूर आदिवासी अंचलों तक सरकारी अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सामग्री, दवाओं और मानक उपकरणों की कमी के लगातार आ रहे मामलों ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग के दावों की हवा निकाल दी है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी लापरवाही पर सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।












