मध्य प्रदेश की सियासत में सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam) के मुआवजे को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने केंद्र और गुजरात सरकार के राजनीतिक दबाव के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। अजय सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश के जायज हक के लगभग 7 हजार 770 करोड़ रुपये का मुआवजा चुपचाप गुजरात के पक्ष में छोड़ दिया है और उल्टा मध्य प्रदेश अब 550 करोड़ रुपये गुजरात को देगा। उन्होंने इसे प्रदेश के डूब प्रभावित किसानों और आदिवासियों के साथ बड़ा धोखा करार दिया है।
दिल्ली की बैठक में हुआ ‘विवादास्पद’ समझौता
अजय सिंह ने भोपाल में जारी एक बयान में बताया कि विगत दिनों दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान (चार राज्यों) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई थी। आरोप है कि इस बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश का पक्ष सशक्त रूप से नहीं रखा और प्रदेश के हितों की अनदेखी करते हुए चुपचाप इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। अजय सिंह ने डॉ. मोहन यादव को एक ‘कंप्रोमाइज्ड मुख्यमंत्री’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना हित पहले देखा और मध्य प्रदेश का बाद में।
“सबसे ज्यादा नुकसान हमारा, तो मुआवजा गुजरात को क्यों?”
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए इस फैसले पर कड़े सवाल उठाए हैं:
- सबसे बड़ी त्रासदी मप्र ने झेली: सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। डैम में डूबी कुल साढ़े सैंतीस हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का 55.50 प्रतिशत हिस्सा (यानी 20 हजार हेक्टेयर से अधिक) अकेले मध्य प्रदेश का है।
- 7,669 करोड़ की थी मांग: मध्य प्रदेश की सबसे उपजाऊ खेती की जमीन, अनमोल जंगल, सरकारी इमारतें और सबसे ज्यादा गांव इस परियोजना में उजड़े हैं। इसी नुकसान और पुनर्वास खर्च की भरपाई के लिए मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7,669 करोड़ रुपये की मांग की थी।
- खजाने पर 550 करोड़ का अतिरिक्त बोझ: इस जायज मुआवजे को छोड़ने के बाद, अब उल्टे मध्य प्रदेश के खजाने पर 550 करोड़ रुपये गुजरात को देने का अतिरिक्त वित्तीय बोझ लाद दिया गया है।
डूब प्रभावित 192 गांवों के किसानों के घावों पर नमक
अजय सिंह ने कहा कि विस्थापन की सबसे बड़ी त्रासदी हमारे मध्य प्रदेश के तमाम गरीब और आदिवासी किसानों ने झेली है। सरदार सरोवर के कारण डूब में आने वाले 192 गांवों के किसानों के लिए यह फैसला सीधे तौर पर उनके घावों पर नमक छिड़कने जैसा है, जबकि इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा लाभार्थी अकेले गुजरात राज्य है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे प्रदेश की जनता और डूब प्रभावित किसानों को सार्वजनिक रूप से जवाब दें कि उन्होंने आखिर किस राजनीतिक दबाव में आकर मध्य प्रदेश के हितों की बलि चढ़ाई और इस आत्मघाती समझौते को स्वीकार किया।












