मध्य प्रदेश में प्रशासनिक विसंगतियों और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर मोहन यादव सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बार निशाना बना है प्रदेश का जल संसाधन और ग्रामीण विकास विभाग। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र की पड़ताल (Investigative Report) का हवाला देते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य में जल संरक्षण अभियानों के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट का बंदरबांट कर दिया गया। विपक्ष का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में जिन तालाबों को ‘पूर्ण’ दिखाकर लाखों का भुगतान उठा लिया गया, धरातल पर उनका कोई वजूद ही नहीं है।
विपक्ष ने उठाए सवाल: “शहडोल में हाईवे के गड्ढे बने तालाब, दमोह से 12 जलाशय गायब”
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तैर रहे आरोपों के अनुसार, विपक्ष ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए कथित घोटालों के तीन मुख्य पैटर्न उजागर किए हैं:
- शहडोल का अनोखा मामला: आरोप है कि शहडोल जिले में नेशनल हाईवे निर्माण के लिए ठेकेदारों द्वारा जो बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए थे, उन्हें ही सरकारी फाइलों में ‘नया तालाब’ दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, प्रति तालाब ₹25-25 लाख की राशि का फर्जी आहरण भी कर लिया गया।
- दमोह में रिकॉर्ड से तालाब गायब: सबसे हैरान करने वाला दावा दमोह जिले को लेकर है, जहाँ कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड से रातों-रात 12 तालाब ही पूरी तरह गायब (मिसिंग) कर दिए गए हैं। कागज़ों पर तालाबों का वजूद और बजट साफ है, लेकिन ज़मीन पर सिर्फ सूखी भूमि है।
- पुराने तालाबों पर ‘नया रंग-रोगन’: प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में पुराने और पूर्व-निर्मित तालाबों पर सिर्फ नया साइनबोर्ड और पुताई करके ‘नूतन जल संरचना’ के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि डकारने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
“यह जल संरक्षण है या भ्रष्टाचार संवर्धन?”- मुख्यमंत्री से मांगे जवाब
इस कथित खुलासे को लेकर विपक्ष ने सरकार की मंशा और ‘काम कम, कागज़ी रिकॉर्ड ज़्यादा’ वाले नए प्रशासनिक मॉडल पर तीखे सवाल दागे हैं। विपक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूछा है कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि यह सरकारी अभियान जल का संचय करने के लिए था या फिर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए?
प्रशासनिक हलके में मची खलबली; जांच की तैयारी भ्रष्टाचार के इस ‘जलाशय’ वाले आरोपों के बाद वल्लभ भवन (मंत्रालय) से लेकर जिला पंचायतों तक हड़कंप मच गया है। हालांकि, सत्तापक्ष और विभागीय अधिकारियों की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या खंडन सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि मामला तूल पकड़ने के कारण ग्रामीण विकास विभाग आंतरिक स्तर पर इन चिन्हित जिलों की फाइलों और जियो-टैगिंग (Geo-tagging) रिकॉर्ड्स की स्क्रूटनी कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि वस्तुस्थिति स्पष्ट की जा सके।












