मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विस्फोट हुआ है। भाजपा के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखित रूप में कहा है कि पिछले ढाई वर्षों में उन्हें केवल ‘असहयोग, उपेक्षा और विरोध’ ही मिला है।
विजयवर्गीय के गंभीर आरोप:
मंत्री ने कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में सरकार की अनदेखी का आरोप लगाया है:
- इंदौर का मास्टर प्लान रोका गया
- मेट्रोपॉलिटन रीजन में इंदौर की उपेक्षा
- एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन न दी जाना
- पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की अनदेखी
- जल संकट में सहयोग न मिलना
- सिंहस्थ के कार्यों में इंदौर को नजरअंदाज करना
राजनीतिक पृष्ठभूमी:
यह विवाद भाजपा की आंतरिक सत्ता संघर्ष को दर्शाता है। कैलाश विजयवर्गीय स्वयं ढाई साल तक इसी सरकार का हिस्सा रहे हैं। अब सवाल उठता है कि अगर इतना बड़ा अन्याय हो रहा था, तो वे चुप क्यों रहे?
जनता पर असर:
यह भाजपा के नेताओं के बीच अहंकार और सत्ता की लड़ाई का परिणाम है, जिसका खामियाजा मध्य प्रदेश की जनता भुगत रही है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा को 20 साल से मिले जनादेश को ‘विकास’ के बजाय ‘सजा’ में बदल रही है?
मध्य प्रदेश को जरूरत है विकास की, न कि भाजपा नेताओं की आपसी लड़ाई की।












