देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले इंदौर से पर्यावरण और आम जनता के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। स्वच्छता में नंबर वन रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से इंदौर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। शहर के विभिन्न हिस्सों में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) प्रभावित होने से सुबह और शाम के वक्त धुंध (Haze) जैसी स्थिति देखी जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम, तेज हवाओं के साथ उड़ती धूल और बढ़ते ट्रैफिक के कारण शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी के बीच झूल रहा है।
Chhoti Gwaltoli और प्रमुख चौराहों पर बढ़ा AQI का स्तर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके ‘छोटी ग्वालटोली’ (Chhoti Gwaltoli) सहित पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, देवास बाईपास और शहर के अंदरूनी मुख्य चौराहों पर हवा में तैरने वाले सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की मात्रा सामान्य से काफी अधिक दर्ज की गई है। शहर के कुछ हिस्सों में रात और सुबह के पीक आवर्स के दौरान एक्यूआई (AQI) 110 से 120 के पार पहुंच रहा है। वायु प्रदूषण का यह बढ़ता ग्राफ यह संकेत दे रहा है कि केवल कचरा प्रबंधन ही नहीं, बल्कि हवा को साफ रखने के लिए भी अब शहर को एक ठोस और कड़े एक्शन प्लान की सख्त जरूरत है।
फेफड़े और सांस के मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, डॉक्टरों की सलाह
प्रदूषण के इस बढ़े हुए स्तर का सीधा असर अब अस्पतालों में भी देखने को मिल रहा है। एमवाय (MY) अस्पताल सहित शहर के प्रमुख श्वसन रोग विशेषज्ञों (Pulmonologists) के पास अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और लगातार खांसी से पीड़ित मरीजों की संख्या में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारी से ग्रसित लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह और देर शाम को भारी आउटडोर एक्सरसाइज या वॉक करने से बचें। इसके साथ ही, धूल भरे इलाकों से गुजरते समय चेहरे पर मास्क का उपयोग अवश्य करें, ताकि इन हानिकारक प्रदूषक कणों से फेफड़ों को सुरक्षित रखा जा सके।

















