भोपाल। मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के संगठन में एक बड़ा बदलाव अब बस दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल की हालिया बैठक के बाद पार्टी के भीतर वह रफ्तार आ गई है जिसका हजारों कार्यकर्ता लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। भारतीय जनता युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, ओबीसी मोर्चा सहित तमाम बचे हुए मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा अब इसी सप्ताह होने जा रही है।
जामवाल की बैठक ने बदली तस्वीर
पार्टी सूत्रों के मुताबिक क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने हाल ही में पार्टी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक ली, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि अब देरी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि 2 से 3 दिनों के भीतर कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया पूरी की जाए और जो नाम अभी तक अटके हुए हैं, उन्हें अंतिम रूप दिया जाए। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी शामिल हुए। जामवाल की यह सख्त हिदायत ही वह टर्निंग पॉइंट है जिसके बाद पूरी तैयारी ने अचानक गति पकड़ ली।
आखिर इतना इंतजार क्यों करना पड़ा?
यह सवाल हर उस भाजपा कार्यकर्ता के मन में है जो महीनों से किसी न किसी पद की उम्मीद लगाए बैठा था। दरअसल इस देरी के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। पहली बड़ी वजह थी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव — जब तक केंद्रीय नेतृत्व की तस्वीर साफ नहीं होती, राज्य स्तर पर बड़े संगठनात्मक फैसले रोके रखना पार्टी की परंपरागत रणनीति रही है। दूसरी वजह थी निगम-मंडलों और प्राधिकरणों की नियुक्तियों का अटकना, जिसकी सूची दिल्ली भेजी जा चुकी थी लेकिन हरी झंडी मिलने में वक्त लगा। तीसरी और सबसे अहम वजह यह रही कि प्रदेश में फिलहाल कोई विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं है, इसलिए पार्टी ने पहले संगठन की मजबूती पर ध्यान देने का फैसला किया।
किन मोर्चों की सूची अभी बाकी है?
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अब तक महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्षों की नियुक्ति कर चुके हैं। अनुसूचित जनजाति मोर्चे की घोषणा तो पहले ही हो चुकी है। अब अल्पसंख्यक मोर्चे को छोड़कर बाकी सभी मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी यानी उपाध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष और मंत्रियों की सूची जारी की जानी है। खंडेलवाल ने खुद मीडिया के सामने यह स्वीकार किया है कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और नियुक्तियाँ लगभग एक साथ होंगी।
कार्यकर्ताओं में उत्साह और बेचैनी दोनों
प्रदेशभर में हजारों भाजपा कार्यकर्ता ऐसे हैं जो विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत लगाने के बाद से किसी संगठनात्मक जिम्मेदारी की राह देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर नामों की संभावित सूचियाँ और अटकलें पहले से ही वायरल हो रही हैं। कुछ नेता खुलकर अपनी दावेदारी जता चुके हैं तो कुछ चुपचाप दिल्ली और भोपाल के नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। जामवाल की बैठक के बाद यह तय हो गया है कि अटकलों का यह दौर अब जल्द खत्म होगा।
BJP का अगला मिशन क्या है?
संगठनात्मक नियुक्तियों में हो रही इस तेजी को केवल रूटीन काम नहीं माना जाना चाहिए। दरअसल भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अभी से जमीन तैयार कर रही है। मोर्चों की कार्यकारिणी बनते ही पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का काम शुरू करेगी। इसके साथ ही पार्टी ने भोपाल से एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान भी शुरू किया है ताकि जैसे ही नए पदाधिकारी नियुक्त हों, वे तुरंत मैदान में उतर सकें। भाजपा के लिए मध्यप्रदेश हमेशा से संगठन की प्रयोगशाला रहा है और इस बार भी यहाँ जो मॉडल तैयार होगा, उसे राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाएगा।
क्या निगम-मंडल नियुक्तियाँ भी एक साथ होंगी?
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियाँ भी उसी फाइल में हैं। सूत्रों के अनुसार इन नियुक्तियों की सूची दिल्ली को भेजी जा चुकी है और संघ से भी इस पर विचार हो चुका है। जैसे ही केंद्र से हरी झंडी मिलती है, संगठन और सरकार — दोनों स्तरों पर एक साथ घोषणाएँ होने की संभावना है। यह एक बड़ा राजनीतिक कदम होगा जो एक ही झटके में सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देगा और उनकी नाराजगी को खुशी में बदल देगा।














