नई दिल्ली / देहरादून। हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड की पवित्र चार धाम यात्रा पर निकलते हैं। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — ये चारों धाम हिंदू आस्था के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिने जाते हैं। अगर आप भी इस साल चार धाम यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं तो यह पूरी गाइड आपके बेहद काम आएगी।
चार धाम यात्रा 2025 — कब खुलेंगे कपाट
इस साल चार धाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के शुभ अवसर से होगी। कपाट खुलने की तिथियां इस प्रकार हैं —
- यमुनोत्री — अक्षय तृतीया के दिन कपाट खुलेंगे
- गंगोत्री — अक्षय तृतीया के दिन कपाट खुलेंगे
- केदारनाथ — महाशिवरात्रि के बाद घोषित तिथि पर
- बद्रीनाथ — केदारनाथ के कुछ दिन बाद कपाट खुलेंगे
सटीक तिथियों की घोषणा उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम बोर्ड की ओर से आधिकारिक रूप से की जाती है।
रजिस्ट्रेशन कैसे करें
चार धाम यात्रा पर जाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रियों को धामों तक जाने की अनुमति नहीं दी जाती।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया:
रजिस्ट्रेशन के लिए उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाएं। यहां अपना नाम, उम्र, पता, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की जानकारी भरें। यात्रा की तारीख और कौन से धाम जाना है यह भी दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन पूरा होने पर एक QR कोड आधारित ई-पास मिलेगा, जिसे यात्रा के दौरान साथ रखना अनिवार्य है।
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन:
जो श्रद्धालु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाते, वे हरिद्वार, ऋषिकेश और रास्ते में बने सरकारी पंजीकरण केंद्रों पर जाकर भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
यात्रा से पहले यह जरूर करें
चार धाम यात्रा पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है —
स्वास्थ्य जांच जरूरी: केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धाम अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं। यात्रा से पहले डॉक्टर से स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और सांस की बीमारी वाले श्रद्धालु विशेष सावधानी बरतें।
जरूरी दस्तावेज साथ रखें: आधार कार्ड, रजिस्ट्रेशन स्लिप, मेडिकल सर्टिफिकेट और यात्रा बीमा के कागजात हमेशा साथ रखें।
मौसम के अनुसार कपड़े: पहाड़ी इलाकों में मौसम अचानक बदल सकता है। गर्म कपड़े, रेनकोट और आरामदायक जूते जरूर रखें।
यात्रा मार्ग और दूरी
चार धाम यात्रा आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। परंपरागत क्रम के अनुसार यात्रा इस प्रकार होती है —
पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ। पूरी यात्रा लगभग 10 से 12 दिनों में पूरी होती है। हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है जो केदारनाथ और बद्रीनाथ के लिए चलती है। हेलीकॉप्टर बुकिंग के लिए भी पहले से ऑनलाइन बुकिंग करना जरूरी है।
ठहरने और खाने की व्यवस्था
रास्ते में धर्मशालाएं, सरकारी गेस्ट हाउस और निजी होटल उपलब्ध हैं। यात्रा सीजन में भारी भीड़ होती है, इसलिए पहले से बुकिंग करना समझदारी है। खाने के लिए रास्ते में लंगर और छोटे भोजनालय मिलते हैं।
इन बातों का रखें खास ख्याल
पहाड़ी रास्तों पर रात को यात्रा करने से बचें। किसी भी अनजान वाहन पर भरोसा न करें। यात्रा के दौरान प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें और पवित्र स्थलों की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। आपातकालीन नंबर और नजदीकी अस्पताल की जानकारी हमेशा अपने पास रखें।
चार धाम की यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से भी अद्भुत अनुभव है। सही तैयारी और जानकारी के साथ यह यात्रा जीवन का सबसे यादगार अनुभव बन सकती है।



















