धार के ऐतिहासिक और संवेदनशील भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व निर्णय लिया है। एएसआई (ASI) सर्वे की रिपोर्ट और जारी विवाद के बीच अब न्यायपालिका स्वयं धरातल पर उतरकर स्थिति का जायजा लेगी।
इंदौर/धार: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद मामले में नया मोड़ आ गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया है कि न्यायाधीश स्वयं विवादित स्थल का मुआयना करेंगे। यह निरीक्षण 2 अप्रैल 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से ठीक पहले किया जाएगा, ताकि कोर्ट के पास जमीनी हकीकत की स्पष्ट जानकारी हो।
जजों का मौका-मुआयना क्यों है खास? कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी भी विवादित ढांचे के मामले में जजों का स्वयं वहां जाना ‘स्पॉट इंस्पेक्शन’ (Spot Inspection) कहलाता है। कोर्ट यह देखना चाहता है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वे और वहां मौजूद धार्मिक चिन्हों की वर्तमान स्थिति क्या है। इससे पहले हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें और साक्ष्य पेश किए थे।
एएसआई सर्वे की रिपोर्ट पर टिकी नजरें हाईकोर्ट ने पहले ही भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के आदेश दिए थे। एएसआई की टीम वहां खुदाई और आधुनिक तकनीक के जरिए अपनी जांच पूरी कर चुकी है। कोर्ट का यह दौरा उस रिपोर्ट की सत्यता और दावों को भौतिक रूप से समझने की एक प्रक्रिया मानी जा रही है। हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी का मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे अपनी इबादतगाह मानता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम हाईकोर्ट के जजों के दौरे की खबर मिलते ही धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए जाएंगे और आम जनता व मीडिया का प्रवेश वर्जित रह सकता है।
विशेषज्ञ राय: यह कदम दिखाता है कि न्यायपालिका इस संवेदनशील मामले में किसी भी जल्दबाजी के बजाय साक्ष्यों की भौतिक पुष्टि (Physical Verification) पर जोर दे रही है। 2 अप्रैल की सुनवाई में यह दौरा एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
















