मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों के लिए अब साल में दो बार परीक्षा देने का प्रावधान किया जा रहा है। यह फैसला छात्रों के मन से परीक्षा का डर निकालने और उन्हें बेहतर स्कोर करने का अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है।
यहाँ इस नई व्यवस्था और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए ‘सफलता मंत्रों’ का विस्तृत विवरण दिया गया है:
एमपी बोर्ड: कक्षा 9वीं-11वीं के लिए नई परीक्षा नीति
| विशेषता | विवरण (Details) |
| नया अवसर | अब साल में दो बार मुख्य परीक्षा आयोजित की जाएगी। |
| मुख्य उद्देश्य | छात्रों के तनाव को कम करना और ड्रॉपआउट रेट को रोकना। |
| अंक सुधार (Score Improvement) | छात्र अपने कम अंक वाले विषय में दूसरी परीक्षा देकर रिजल्ट सुधार सकेंगे। |
| प्रभावी सत्र | यह नियम शैक्षणिक सत्र 2025-26 की वार्षिक परीक्षाओं से प्रभावी माना जाएगा। |
मुख्यमंत्री ने हाल ही में छात्रों के साथ संवाद करते हुए कई मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक टिप्स साझा किए, जो अब ‘मोहन मंत्र’ के नाम से चर्चा में हैं:
- परीक्षा को उत्सव मानें: मुख्यमंत्री ने कहा, “परीक्षा कोई हौआ नहीं है, इसे त्योहार की तरह मनाएं। जब हम किसी उत्सव की तैयारी करते हैं, तो खुश रहते हैं, वैसे ही परीक्षा की तैयारी भी खुशी-खुशी करें।”
- दो बार परीक्षा का विकल्प क्यों?: उन्होंने तर्क दिया कि कई बार बीमारी या किसी अन्य कारण से छात्र एक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। दो बार परीक्षा होने से उन्हें यह तनाव नहीं रहेगा कि उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
- नींद से समझौता न करें: सीएम ने सलाह दी कि रात-रात भर जागकर पढ़ने से मानसिक थकान होती है। 6-7 घंटे की गहरी नींद दिमाग को तरोताजा रखती है, जिससे याद किया हुआ डेटा लंबे समय तक टिकता है।
- लिखने का अभ्यास (Writing Practice): उन्होंने कहा कि केवल पढ़ने के बजाय लिखने की आदत डालें। हाथ से लिखा हुआ दिमाग में जल्दी बैठता है और परीक्षा हॉल में समय प्रबंधन (Time Management) में मदद करता है।
- सोशल मीडिया से दूरी: परीक्षा के दिनों में मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग केवल पढ़ाई से जुड़े संदेह दूर करने के लिए करें, मनोरंजन के लिए नहीं।

















